आईआईटी के पूर्व छात्रों ने बनाया सुपर एक्टिवेटेड कार्बन एन – 95 मास्क

by saurabh

कानपुर। आईआईटी के पूर्व छात्रों ने ऐसा सुपर एक्टीवेटेड कार्बन एन-95 मास्क बनाया है, जो व्यक्ति को कोरोना वायरस के संक्रमण और बाह्य प्रदूषण से तो बचाएगा ही, अपनी ही सांस से निकलने वाली दुर्गंध और बैक्टीरिया से भी बचाएगा। दावा है कि ऑडरलेस (दुर्गंध रहित) टेक्नोलॉजी पर आधारित यह मास्क भारत में अपनी तरह का पहला मास्क है।

डॉ. संदीप पाटिल, नितिन चराते, अंकित शुक्ला और महेश कुमार की टीम ने यह मास्क विकसित किया है। टीम लीडर डॉ. पाटिल ने बताया कि सामान्यत: कोई भी मास्क पहनने पर उसके अंदर दुर्गंध की समस्या बनी रहती है। अपनी ही सांसों से आने वाली दुर्गंध और बैक्टीरिया इसका प्रमुख कारण होते हैं। इस बात को ध्यान में रखकर हमने यह तकनीक विकसित की है। आइआइटी के अलावा निजी प्रयोगशाला में इसका परीक्षण पूरा हो चुका है। अब इसके उत्पादन की तैयारी है। आइआइटी कानपुर के इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर में स्थापित ई-स्पिन नैनोटेक स्टार्टअप कंपनी इसका उत्पादन करेगी। कीमत एन-95 मास्क से कुछ अधिक होगी। इसके इसी माह बाजार में आने की संभावना है।

डॉ. पाटिल ने बताया कि कार्बन को मॉडीफाई करके उसके अंदर नैनो आकार के छिद्र करने की प्रक्रिया एक्टिवेटेड कार्बन टेक्नोलॉजी कहलाती है। सुपर एक्टिवेटेड कार्बन में यह प्रक्रिया और अधिक बारीक छिद्रों वाली होती है। मास्क में इन्हीं सुपर एक्टिवेटेड कार्बन कणों की परत चढ़ाई गई है। यह कार्बन कण दुर्गंध उत्पन्न करने वाले सूक्ष्ण कणों को जकड़ लेते हैं और रासायनिक प्रक्रिया के तहत उन्हें अवशोषित कर लेते हैं। कार्बन को चार्ज करके तैयार करने पर उसकी प्रॉपर्टी बदल जाती है, लिहाजा वह शरीर के लिए नुकसानदेह नहीं होता है। वहीं, मास्क की बाहरी परत इलेक्ट्रोचार्जड नैनो पार्टिकल्स की कोटिंग से युक्त है, जिसके संपर्क में आने पर वायरस निष्प्रभावी हो जाता है।

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