कौशांबी :- गरीबों को दो जून आसानी से रोटी उपलब्ध हो इसी उद्देश्य से सरकार सस्ते दर का खाद्यान्न कार्ड धारकों को उपलब्ध कराती है। इन दिनों तो कोरोनावायरस की महामारी में सरकार ने निशुल्क राशन वितरण की भी व्यवस्था बनाई है।

लेकिन भरवानी कस्बे में राशन गोदाम में आधा दर्जन माफिया कई दशक से हावी है। जो गरीबों के पेट के निवाले को कोटेदारों से खरीद कर बेच लेते हैं। राशन माफियाओं का सरगना बीते दस वर्ष से कोई मोहित नाम का व्यक्ति बताया जाता है।

संगठन से अपने को जोड़कर वह अधिकारियों पर धौस जमाता है। सूत्रों की माने तो बीते कई वर्षों से भरवारी का यह मोहित नाम का राशन माफिया 50 लाख से  70 लाख रुपए महीने की कोटे के गेंहू चावल की खरीद कर कालाबाजारी में बेचने के धंधे में लिप्त है।

गरीब परिवार में जन्मे मोहित ने गरीबों के पेट के निवाले की कालाबाजारी कर देखते-देखते करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है। इनका हौसला इस कदर बुलंद है। कि सरकारी कोटे के गेहूं चावल को बोरी को बदलकर यह गोदाम के साथ-साथ सड़क की पटरियों पर भी एकत्रित कर देते हैं। लेकिन इस राशन माफिया पर अभी तक विभाग के अधिकारियों ने कार्यवाही नहीं की है। जिससे राशन माफिया का हौसला बुलंद है।

गरीबों के पेट का निवाला छीन कर मालामाल बने इस राशन माफिया के कारनामों पर यदि शासन प्रशासन ने संज्ञान लिया तोवर्षों से बेखौफ तरीके से चल रहा माफिया का यह काला कारोबार बंद होगा। वही माफिया के गुनाहों पर उसे जेल हो सकती है लेकिन क्या बीते कई वर्षों से राशन की कालाबाजारी में लिप्त मोहित पर आला अधिकारियों का चाबुक चलेगा यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।

रिपोर्ट श्रीकान्त यादव