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उर्स-ए-रजवी में लगेगा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्लामिक किताबों का मेला

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बरेली::इस्लामियां कॉलेज के मैदान में होने वाले आला हजरत के तीन दिनी उर्स-ए-रजवी में इस बार दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्लामिक किताबों का मेला लगेगा। इसकी तैयारियां हो गई हैं। मुंबई की रजा एकेडमी की ओर से आधे रेट में किताबें बेचने का स्टॉल भी लगाया जाएगा। वहीं आपको बता दें कि किताबों का दुनिया में सबसे बड़ा मेला दुबई में लगाया जाता है।उर्स-ए-रजवी का 23 अक्टूबर से आगाज हो रहा है। यह दुनियाभर में अपनी खूबियों के लिए जाना जाता है। उर्स-ए-रजवी की एक और खूबी है। यहां इस्लामी जगत का दूसरे नंबर और हिन्दुस्तान का पहला इस्लामी किताबों का मेला भी लगता है। दरगाह से जुड़े नासिर कुरैशी ने बताया कि आला हजरत ने सात साल की उम्र में अरबी में एक किताब लिखी थी, वह उनकी पहली किताब थी। उसके बाद उन्होंने पूरी जिंदगी में करीब 1200 किताबें लिखीं। उनके अरबी अंग्रेजी, बांग्ला, गुजराती आदि कई भाषाओं में अनुवाद हो चुके हैं। इस्लामी किताबों के साथ इस मेले में आला हजरत, उनके शहजादों और खानकाहे बरकातिया के बुजुर्गों की किताबें भी उपलब्ध रहेंगी।इस्लामी उलूम व फुनून की किताबों मसलन इल्मे फिकह, हदीस, तफ्सीर, इस्लामी तारीख आदि विषयों पर आधारित किताबों का दुनिया का सबसे बड़ा मेला दुबई में लगता आया है। उस मेले में दिल्ली, मेरठ, आगरा, मुरादाबाद, रामपुर, बनारस, आजमगढ़, मऊ, इलाहाबाद आदि के करीब 250 प्रकाशक अपने स्टॉल लगाते हैं। पिछली बार उर्स में तुर्की इस्ताम्बुल के ‘हकीकत किताबेबी’ इस्लामिक बुक प्रकाशन लिमिटेड’ ने पहली बार इस्लामिया ग्राउंड में अपना बुक स्टॉल लगाकर मुफ्त में किताबें बांटी थीं। वह प्रकाशन इस बार भी जायरीनों को आला हजरत की लिखी हुई उर्दू-अरबी भाषा की किताबों की लाखों प्रतियां मुफ्त में वितरित करेगा। इसके अलावा मुंबई की रजा एकेडमी की ओर से आला हजरत की लिखी हुई किताबों को हिन्दी, अंग्रेजी, अरबी, फारसी, उर्दू में प्रकाशित कराकर जायरीनों को आधे रेट में बेचेगा। रिपोर्ट ज़ाहिद अली पीलीभीत
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