जीवन संघर्ष और संग्राम है
हार-जीत चलती रहती है
जब तक जीत का सपना मौजूद है
हार उसके मनोबल को तोड़ नहीं सकती
उसकी लड़ाई पूरी ताकत से जारी रहती है
फिर उसकी जीत को कोई रोक नहीं सकता
एक कवि ( कुंवरनारायण ) ने
कितनी सही बात कही है-
” हारा वही / जो लड़ा नहीं । “

तुम्हारी लड़ने की ताकत ही
तुम्हारे भविष्य की निर्णायक है
जो लड़ने से डरता है
वह मौत से पहले मर जाता है ।

हर आदमी को अपनी लड़ाई
खुद लड़ना होती है
राम , कृष्ण , गांधी…….
हर बार नहीं आते
तुम्हारी लड़ाई लड़ने को

लड़ाई ही तुम्हारा अस्तित्व है
इसके बिना तुम्हारा कोई अस्तित्व नहीं

साथियो ! लड़ते रहो लड़ते रहो
हर बुराई के खिलाफ़
तुम्हारा अस्तित्व जिन्दा रहेगा
तुम्हारी मौत के बाद भी ।

–🖋️नीतू झा