कभी कभी तो अपने बारे में ही लगता है
हम खुद को जानते भी हैं क्या ?
बड़ी-बड़ी बातों को जानने का दावा करने वाले हम इंसान
ब्रह्मांड और सारी सृष्टि तथा प्रकृति का ज्ञान बांटने में लगे हम इंसान
कौतूहल मन लिए श्रेष्ठ बनने के विचार रखने वाले हम इंसान
ज्ञान की आंँखें ना होते हुए भी हम आंँख वाले इंसान
छोटी-छोटी बातों पे बड़ी-बड़ी विचारधाराएँ छाँटने वाले
हम मंद बुद्धि से इंसान

पा लेने के बाद खो देने और खो देने के बाद पुनः पा लेने को आतुर हम इंसान
अनसुलझी को सुलझा के खुद में ही उलझ जाने वाले हम इंसान
कभी किसी चीज को जानने/ पाने के पीछे संसार से भागते रहते हैं
और कभी संसार को फिर पाने के लिए आकुल हम इंसान

पत्थर में भगवान को ढूंढना और खुद में भगवान को भूल जाने वाले हम इंसान
अराजकता से जीतना, उद्दंडता से अपने अधिकार की अपेक्षा करने वाले हम इंसान
तुच्छ मानसिकता वाले और खुद से ही अभिज्ञेय,
स्वयं को ही छलने वाले हैं हम इंसान

क्या… सचमुच,हम खुद को जानते भी हैं ?????
हजारों रूपों वाले…नहीं,नहीं…हजारों रूपों वाले नहीं…
पल-पल रूप बदलने वाले हम इंसान
क्या सब कुछ जानने के होड़ में हम खुद को ही भूल गए ?

हम भूल गए अपने अंदर छिपी उस
चेतना को
जो वास्तव में हमें इंसान बनाती है

छोड़ दो अपनी सारी बड़ी बड़ी
बुद्धि की बातें
छोड़ दो अपनी सारी लालसाएँ
छोड़ दो अपने भीतर बसी g
दरिद्र हीनता की भावना
समझो अपने आपको तुम श्रेष्ठ हो

पर कोई तुमसे कभी श्रेष्ठ नहीं हो सकता
ऐसा भी मत सोचो
सब अपनी अपनी जगह श्रेष्ठ हैं
इसे भी जानलो

अगर कुछ जानने इक्छा है तो स्वयं को जानने की कोशिश करो…
अपने ही अंदर के इंसान को ढूंढने की कोशिश करो…
श्रेष्ठ तो तुम हो ही…पर सबसे श्रेष्ठ हो तुम यह भी समझने की भूल मत करना

बस जिस दिन भी यह सब समझ लोगे
यकीनन उस दिन तुम स्वयं को
खुद जान लोगे
खुद को पहचान लोगे…

Writer : Neetu Jha