जेल में रहने वालों का जीवन यापन ठीक ढंग से हो इसके लिए जेल के नियमों में आमूलचूल परिवर्तन समय समय पर करने आवश्यक हो जाते हैं। बांदा जेल के अधिकारियों ने इसकी अच्छी मिसाल पेश की है।

कैदियों की परिस्थिति में सुधार से पहले जेलर और डी एम ने कुछ बातें ध्यान में रखी। जैसे की कैदियों में नई ऊर्जा और उत्पादकता कैसे लाएं, शून्य या कम से कम खर्च के साथ बदलाव कैसे लाएं, उन कार्यों को शामिल करें जिनमें कैदियों की रुचि हो और उनसे उनकी कौशलता और बुद्धि का विकास हो। इसके बाद उन्होंने कुछ नीतियों का निर्माण किया।

प्रत्येक सुबह, कैदी उठ कर योगा करते हैं। अपनी पसंद के खेल में हिस्सा लेते हैं। चूंकि बांदा में संस्कृति का भंडार है तो जेल में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं। जेल की सफाई करते हैं, चिड़ियों को दाना देते हैं और रंगाई पुताई का काम भी करते हैं। महिला कैदी अपनी पसंद से काम लेती हैं जैसे कि सिलाई बुनाई।
जेल में तीज-त्योहार भी मनाये जाते हैं।

दिसंबर 2019 में जेलर आर.के सिंह को उनके इस काम के लिए “तिनका तिनका” पुरस्कार के साथ सम्मानित किया गया। बांदा जेल कि दो महिला कैदी – संध्या और ममता को प्लास्टिक मुक्त भारत और जुट के बैग बनने के लिए सम्मानित किया गया।

कोरोना वैश्विक महामारी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 23 मार्च 2020 को अपने निर्देश में जेलों में सात साल से कम की सजा काट रहे कैदियों को अंतरिम जमानत या पैरोल पे भेजने को बोला है।
इसे देखते हुए राज्य सरकार ने भी ऐसे कैदियों कि सूची तैयार कर ली है। इससे बांदा जेल के भी कैदियों में ज़रूरी दूरी बनी रहती है और बीमारी के फैलने का खतरा कम होता है।