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खबरदार! थाने पहुँचा सकती है भंडारे की पूरी

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भंडारे की पूरी और चटपटी सब्जी खाने के बाद दोने के कोने में पड़ी सब्जी हाथ की एक अंगुली से चाटने में जो आनंद आता है। कसम से वह 56 भोग में भी नहीं मिलता। हमें तो साल भर नवरात्र और रामलीला का ही इंतजार रहता है। यह समय पूरी सब्जी के शौकीनों के लिए सबसे मुफीद है। किसी भी चौराहे पर कुछ देर के लिए खड़े हो जाओ। सोंधी सुंगध आपको अपनी ओर खींच ही लेगी। पर इस साल माहौल टेंशन वाला हो गया है। असल मे जब से मोदी जी ने मंच से प्लास्टिक को ललकारा है, हमारे शहर में जिसे देखो वह भगत सिंह बना घूम रहा है। दुकान, मकान, खेत खलिहान हर जगह प्लास्टिक खोजो अभियान चल रहा है।

कल की ही तो बात है, घुमक्कड़ एक चौराहे से निकल रहा था। तभी एक भंडारे के पंडाल के सामने प्राधिकरण के एक साहब की गाड़ी रुकी। अर्दली ने आवाज लगाई, भंडारा कौन करा रहा है। आयोजक को लगा कि साहब भी सब्जी पूरी का आनंद लेने आये होंगे। आज तो जमकर शाबाशी मिलेगी, लेकिन यहां तो मामला ही उल्टा पड़ गया। साहब ने फटकारा। पूरी सब्जी तक तो ठीक है, लेकिन प्लास्टिक (थर्माकोल)का दोना क्यों लाए। तुम्हे तो जेल जाना होगा। बेचारे आयोजक के चेहरे पर पसीने की बूंदे झलक उठीं। उसी दिन कसम खाई कि जीवन में कभी भंडारा नही करेगा। खैर यह तो एक उदाहरण है। टेंशन केवल भंडारे वालों को ही नही है। बड़े शोरूम से लेकर सड़क किनारे सब्जी और खोमचे वाले तक टेंशन में हैं।

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बड़ी बिंदी वाली मैडम भी आजकल जबरदस्त सक्रिय हैं। इनके दरवाजे से तो फेरीवालों तक ने निकलना बंद कर दिया है। वैसे प्राधिकरण वाली मैडम ने इस बार भी कमाल किया है। अब तक आपने रोटी बैंक, कपड़ा बैंक, चिल्ड्रन बैंक तो सुनी होगी। लेकिन क्या बर्तन बैंक के बारे में सुना है। नही न । तो अब सुनिए, अरे सुनिए ही क्या। खुद इस अनोखे बैंक का दीदार भी कर लीजिए। शादी व्याह समारोह में जरूरत पड़े तो बर्तन भी ले आइए। बस मैडम की एक ही गुजारिश है। प्लास्टिक को बाय- बाय कह दीजिये। बात काफी हद तक ठीक ही है। जरा सोचिए हम भंडारा और प्रसाद बांटकर बात तो पुण्य कमाने की करते हैं। लेकिन क्या कभी सोचा है कि प्लास्टिक की जूठी प्लेट और दोना का क्या होता है। असल में यह प्लास्टिक शहर में घूमने वाले बेसहारा जानवर पूरी सब्जी के साथ खा जाते हैं और उनकी असमय मौत हो जाती है।

चौराहे पर झाड़ू लगाने के बाद जब कोई सफाईकर्मी लापरवाही से इस प्लास्टिक को जलाता है तो यह धुंआ बनकर हमारे आपके फेफड़ों को खोखला कर देती है और हम असमय बीमार हो जाते हैं। कारण कई हैं, जिन्हें गिनाया नही जा सकता। बस हम तो यही कहेंगे कि भंडारे की पूरी खानी है और सब्जी के चटकारे लेने हैं तो घर से कटोरी साथ लेकर निकलें। खुद भी प्लास्टिक से परहेज करें और दूसरों को भी जागरूक करें।

  • आशुतोष अग्निहोत्री जी, की वाॅल से साभार
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