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गांधी 150……..

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“आने वाली नस्लें शायद मुश्किल से ही विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना हुआ कोई ऐसा व्यक्ति भी धरती पर चलता-फिरता था।”

ये शब्द अल्बर्ट आइंस्टीन ने महात्मा गांधी की 75वें जन्मदिन पर कहीं थी। ठीक ऐसा ही हुआ आने वाली नस्लें आज भी महात्मा गांधी के आकर्षक व्यक्तित्व से प्रभावित होती हैं। उनके बारें में चर्चा करती हैं। और अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए महात्मा गांधी के विचारों व तरीकों को आज भी प्रयोग करती हैं। महात्मा गांधी आज हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन उनकी शिक्षाएं और आदर्शवादिता हमारे बीच हैं। गांधीवाद चिरस्थाई है भारत के साधारण जनमानस के बीच। ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि महात्मा गांधी अब तक के भारतीय इतिहास के सबसे बड़े जननेता रहे हैं। असहाय भारतीयों के सबसे बड़े उम्मीद थे। मजदूरों, किसानों, शोषितों की आवाज़ और सबसे बड़ी बात संपूर्ण राष्ट्र को एक सूत्र में पिरो के चलने की दृढ़ इच्छा से सुसज्जित।

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नमन महात्मा गांधी को जिन्होंने ‘अहिंसा’ नामक उस प्राचीन भारतीय मंत्र को पुनः स्थापित किया जो हमारी पहचान थी।

कुलदीप कुमार ‘निष्पक्ष’

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