Home StateUttar Pradeshkaushambi गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले लेखपाल पर कार्यवाही से कतरा रहे आला अधिकारी

गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले लेखपाल पर कार्यवाही से कतरा रहे आला अधिकारी

by nikhil
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कौशाम्बी :- मंझनपुर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत रायपुर ग्राम पंचायत में खतौनी खाता संख्या 00279 की तालाब की आराजी संख्या 468 रकबा 0. 616 पर कब्जा करके घर बना लिए जाने के मामले में कई वर्षों बीत जाने के बाद भी सरकारी भूमि पर प्रशासन कब्जा नहीं हटा सका है।



जबकि भूमि प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ग्राम प्रधान ने भी जिला अधिकारी को पत्र लिखकर अवैध कब्जे हटाए जाने की मांग की थी लेकिन भूमि प्रबंधन समिति के इस पत्र भी सरकारी जिम्मेदार तालाब से कब्जा नहीं हटा सका है। तालाब से कब्ज़ा हटाए जाने के मामले में लेखपाल द्वारा बार-बार बदलकर रिपोर्ट दी जा रही है।

जिससे यह साबित हो रहा है कि लेखपाल कब्जा धारकों से तिजोरी भर कर गिरगिट की तरह रंग बदलने में उसे महारत हासिल है अपनी ही रिपोर्ट को झूठा करार देने वाले लेखपाल पर दो वर्ष बीत जाने पर भी कार्यवाही नही हो सकी है।



तालाब की भूमि से कब्जा हटाया जाने का निर्देश उच्च न्यायालय में पीआईएल 1101/ 2019 की सुनवाई करते हुए 27 मई 2019 को दिया है मामले की सुनवाई आगे भी जारी किया है।

इसी तालाब की भूमि को लेकर उप जिलाधिकारी मंझनपुर की अदालत में मुकदमा संख्या 3421/ 17 ढाई वर्षो से अधिक समय से विचाराधीन है इस मुकदमे की सबसे अहम बात यह है कि 2 वर्षों से इस मुकदमे में साक्ष्य वादी लिखकर मुकदमे की अगली तारीख नियत कर दी जाती है देश की अदालतों का यह हाल चिंता का विषय है।



अहम बात यह है कि 03 सितंबर 2017 को लेखपाल द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में यह लिखा गया है कि तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा है और फिर लेखपाल ने 06 अक्टूबर 2018 को रिपोर्ट भेजी है जिस पर तालाब पर अवैध कब्जे की बात से इनकार करते हुए।

तालाब की भूमि लेखपाल ने सुरक्षित बताई है लेखपाल की इसी रिपोर्ट पर असिस्टेंट कलेक्टर प्रथम श्रेणी मंझनपुर ने 27 फरवरी 2019 को आदेश पारित कर कब्जा धारकों के विरुद्ध जारी आर सी को वापस लेने का निर्देश दे दिया है जिससे कब्जा धारकों को जुर्माने की राशि सरकारी खजाने में जमा करने से राहत मिल गई है।



वही तहसीलदार के इस आदेश के बाद तालाब की भूमि पर कब्जा बरकरार रह गया है सरकारी भूमि के सुरक्षा के मामले में जिम्मेदारों का यह बर्ताव चिंता का विषय है और जिम्मेदारों की इन कारनामो को शासन ने यदि गंभीरता से लिया तो जिम्मेदारों पर गाज गिरना तय है लेकिन क्या योगीराज में मनमानी कर रहे इन जिम्मेदारों पर सरकार का चाबुक चल पाएगा यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।


रिपोर्ट श्रीकान्त यादव

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