गोण्डा:-  वैसे तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा वन्य जीव संरक्षण मंत्री दारा सिंह चौहान सूबे में वृक्षारोपण महाभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण के लिए अरबों रूपये खर्च कर चुके हैं, लेकिन पुलिस और वन महकमा मोटी कमाई के लिए वन माफियाओं से साठगांठ कर प्रतिबंधित वृक्षों का सफाया करा रहा है। वैसे तो पुलिस अधीक्षक शैलेश पाण्डेय भी पेड़ों की अवैध कटान के सख्त खिलाफ हैं, लेकिन इसके बावजूद जिले के मोतीगंज थाना क्षेत्र में तो पुलिस तथा वन विभाग के लोग सरकार और पुलिस अधीक्षक के मंसूबे पर पानी फेर रहे हैं।

सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे जिम्मेदार

ताजा मामला मोतीगंज के नौबरा गांव का है। इस गांव में मंगलवार को शीशम के 6 पेड़ों को बगैर परमिट के ही धराशायी कर दिया गया। तथा नीम का एक पेड़ ठेकेदार द्वारा कटवा लिया गया। मंगलवार को ही क्षेत्र के गप्पीगंज चौराहे के पास आम के पेड़ बगैर परमिट के काट डाले गए। बनकसिया गांव में सागौन व जामुन के पेड़ बगैर परमिट के काट लिए गये। वहीं नौबरा के तुलसीपुर में सागौन के पेड़ों को धराशायी कर दिया गया।

पुलिस और वन विभाग की मिलीभगत से मोतीगंज क्षेत्र में किया जा रहा वृक्षों का सफाया

सूत्र बताते हैं कि मोतीगंज थाना क्षेत्र में प्रतिदिन हरे भरे प्रतिबंधित पेड़ों की खुलेआम कटान होती है जिसके बदले में वन विभाग के जिम्मेदार एक निश्चित मोटी रकम लेते हैं यहां जंगल की रखवाली के लिए तैनात किया गया वन रक्षक ही भक्षक बनकर हरे भरे प्रतिबंधित पेड़ों को रूपये के लालच में धराशाई करा रहा है। सरकार वृहद स्तर पर प्रदेशभर में वृक्षारोपण महाअभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कर रही है, जबकि वन और पुलिस विभाग सरकार की मंशा पर पानी फेरते हुए वृक्षों के सफाए के लिए अभियान चला रहे हैं।

माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की दरकार

बताते चलें कि पुलिस अधीक्षक शैलेश पाण्डेय ने करनैलगंज के कोतवाल राजनाथ सिंह व दीवान को पेड़ों को कटवाने के संबंध में ऑडियो वायरल होने के बाद सस्पेंड कर दिया था, जिसके बाद महकमे में पेड़ों की कटान को लेकर हड़कंप मच गया था लेकिन धीरे-धीरे सिस्टम पुराने ढर्रे पर आ गया है और खुलेआम पेड़ों की कटान की जा रही है।

रिपोर्ट राहुल तिवारी जिला संवाददाता गोंडा