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जापान की मदद से अब आसानी से मिलेगा पेटेंट

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अपनी नई इजाद की हुई तकनीकि का पेटेंट करवाने वालों के लिए अब खुशखबरी है। भारतीय पेटेंट कार्यालय ने जापान पेटेंट कार्यालय (जेपीओ ) के साथ पीपीएच स्तर पर एक पायलट कार्यक्रम की शुरूआत कर रहा है। यह कार्यक्रम शुरू में तीन वर्ष की अवधि के लिए पायलट आधार पर जेपीओ और भारतीय पेटेंट कार्यालय के बीच शुरू होगा। इस पायलट कार्यक्रम के तहत, भारतीय पेटेंट कार्यालय को केवल कुछ विशेष क्षेत्रों जैसे बिजली, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, भौतिकी, सिविल, यांत्रिकी, वस्त्र, ऑटोमोबाइल और धातु विज्ञान कुछ निर्दिष्ट तकनीकी क्षेत्रों में पेटेंट आवेदन प्राप्त हो सकते हैं। जापान पेटेंट कार्यालय प्रौद्योगिकी के सभी क्षेत्रों में आवेदन प्राप्त कर सकता है।

वर्ष 2014-15 में, लगभग 6000 पेटेंट प्रदान किए गए थे और लगभग 15,000 पेटेंट आवेदनों का निपटान भी किया गया था, जो वर्ष 2018-19 में बढ़कर 15,000 से अधिक हो गया है और पेटेंट आवेदनों का निपटान भी 51000 के करीब पहुंच गया, एवं वर्ष 2018-19 में यह लगभग 25,000 तथा 60,000 पहुंचने की संभावना है। वर्ष 2014-15 में एक पेटेंट आवेदन की जांच का समय जो लगभग 72 महीने था, वर्तमान में कम होकर 36 महीने हो गया है और मार्च 2021 तक इसे घटाकर 12-16 महीने करने का लक्ष्य रखा गया है। पेटेंट का सबसे तेज अनुदान जांच अनुरोध के 67 दिनों में हुआ है।

भारत में पेटेंट सुरक्षा की मांग करने वाले जापानी अन्वेषकों अब पीपीएच पर पायलट कार्यक्रम के तहत भारत में शीघ्र जांच का लाभ उठा सकेंगे। भारत में पेटेंट के तेजी से अनुदान के परिणामस्वरूप कंपनियों द्वारा अधिक निवेश होगा और साथ ही नई तकनीकों की शुरूआत होगी जिससे भारत में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह जापान में पेटेंट कराने में भारतीय स्टार्टअप की भी मदद करेगा।

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