जिला अस्पताल के सामने सड़क की जमीन कब्जा करने की लगी है होड़

by News Desk
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कौशाम्बी :- सरकारी जमीनों में अवैध कब्जों के मामले को देखना है तो आपको कौशांबी जिले की व्यवस्था देखनी होगी इस जिले की सरकारी संपत्तियों में कब्जा करा कर राजस्व कर्मी मालामाल हुए हैं बार-बार शिकायतों के बाद भी सरकारी जमीनों के कब्जे को रोकने के प्रति आला अधिकारी भी गंभीर नहीं है।

लुकाछिपी के इस खेल में जिले की सरकारी संपत्तियों पर रोज कब्जे हो रहे हैं अकेले जिला अस्पताल के सामने सड़क की नाली और पटरियों पर देखते-देखते कुछ वर्षों में डेढ़ दर्जन से अधिक पक्की दुकानों का निर्माण हो गया है खुलेआम सड़क की पटरियों पर अस्पताल बाउंड्री के बाहर निर्माण की बात अधिकारी भी देख रहे हैं लेकिन अवैध कब्जे को हटाने की कार्यवाही नहीं शुरू हो सकी हैं।



जिला अस्पताल के बाउंड्री के बाहर नाली और पटरी पर पक्की दुकानों का निर्माण कर लिए जाने से जिला अस्पताल का गंदा पानी नाली से नहीं बह पाता जिसके चलते जिला अस्पताल का गंदा पानी मुख्य गेट पर और अस्पताल परिसर में फैल रहा है मुख्य गेट पर पानी भर जाने से बीमार और कमजोर मरीजों को अस्पताल आने में भी दिक्कतें होती हैं।

लेकिन इस समस्या के समाधान के प्रति जिम्मेदार उदासीन है गंदगी के चलते अस्पताल में आने वाले मरीज और उनके परिजन संक्रमण बीमारी के चपेट में आते हैं लेकर इस गंभीर समस्या है के समाधान के प्रति अधिकारी गंभीर नहीं है।



डेढ़ दर्जन से अधिक पक्की दुकानों के निर्माण के बाद दो दर्जन से अधिक दुकानें निर्माण कराने की फिराक में कब्जा धारक है कुछ जगहों पर छप्पर झोपड़ी डालकर और जमीन में मिट्टी डालकर अपना मालिकाना हक सरकारी जमीन पर कर दिया गया है।

और जैसे ही कुछ दिन की छुट्टी का मौका मिलेगा झोपड़पट्टी हटाकर पक्की दुकानें बना दी जाएंगी बीते दस दिन से जिला अस्पताल के बाहर पटरी पर नाली कब्जा कर आधा दर्जन दुकानें निर्मित हो रही है।

बार-बार लोगों ने जिम्मेदारों से शिकायत की लेकिन अवैध निर्माण को रोकने के प्रति जिला अस्पताल प्रशासन मुख्य चिकित्सा अधिकारी लोक निर्माण विभाग के अधिकारी नगर पालिका के अधिकारी तहसील और पुलिस के अधिकारी गंभीर नहीं है।

आखिर सड़क की पटरिया पैदल और साइकिल से चलने वालों के लिए छोड़ी जाती हैं फिर इस पर पक्के भवन कैसे बनते हैं इसका जवाब देह कौन है लेकिन पक्के भवन बनाने के बाद धराशाही करने के प्रति किसी भी अधिकारी की ओर से कोई सार्थक कार्यवाही होती नहीं दिख रही है।



रिपोर्ट श्रीकान्त यादव

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