जिला अस्पताल में डॉक्टर ने किया गलत ऑपेरशन, गाल ब्लेडर की जगह निकाल दी बच्चेदानी

by saurabh

कानपुर। सरकारी हास्पिटलो में मरीजों के इलाज में लापरवाही के मामले अक्सर सुर्खिया में रहते है। इलाज में लापरवाही करने वालो पर कार्यवाहियां भी होती है। लेकिन डाक्टर इसके वावजूद सबक नहीं लेते है। ऐसा ही एक मामला कानपुर में सामने आया। जहां जिला डफरिन हॉस्पिटल में गाल ब्लेडर के आपरेशन को भर्ती हुई महिला का डाक्टर ने बच्चेदानी का आपरेशन कर उसको निकाल दिया।

उर्सला जिला हॉस्पिटल में भर्ती नीतू अब कभी माँ नहीं बन पाएंगी, क्योकि हॉस्पिटल के डाक्टर ने लापरवाही से उसकी बच्चेदानी ही निकाल दी है। नीतू का आरोप है कि पेट दर्द होने पर परिजनों के साथ उर्सला अस्पताल पहुंची थी, जहा डाक्टर प्रशांत ने गाल ब्लेडर में पथरी बताकर उसका ऑपरेशन करने को कहा। लेकिन जब डाक्टर प्रशांत ने आपरेशन किया तो गाल ब्लेडर निकालने की बजाय बच्चेदानी को ही निकाल दिया। जब इस मामले की जानकारी परिजनों ने अस्पताल प्रशासन को दी जहां अस्पताल प्रशासन मामले को दबाने में जुट गया है। नीतू का यह भी कहना है अब वह डाक्टर प्रशांत मेरा इलाज तक करने से कट रहे है।

नीतू लाटूश रोड में रहती है और उसका पति संजय मजदूरी का करता है। पिछले दिनों उनकी पत्नी नीतू की तबीयत खराब हो गई थी। जिसमें उसने पेट दर्द की शिकायत बताई थी। उसे परिजन अस्पताल दिखाने गए और डॉक्टरों ने पेट दर्द की वजह पित्त में पथरी होना बता ऑपरेशन के लिए कहा। परिजनों ने डॉक्टर के कहे मुताबिक उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया। बुधवार को ऑपरेशन होने के बाद उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन थोड़ी देर बाद ही महिला के दर्द उठा तो डॉक्टर उसे दोबारा ऑपरेशन थिएटर ले गए और परिजनों को बिना बताए दूसरा ऑपरेशन भी कर दिया। जब परिजनों ने दोबारा इस तरीके से ऑपरेशन करने की वजह पूछी तो डॉक्टर प्रशांत मिश्रा गोलमोल जवाब देने लगे। जब परिजनों ने इस मामले की पड़ताल शुरू करी तो हकीकत कुछ और ही सामने आई।

जानकारी हुई कि पहले वाले ऑपरेशन में गॉलब्लैडर की जगह बच्चेदानी निकाल दी थी। जबकि दूसरे ऑपरेशन में गॉलब्लेडर वाली पथरी को निकाला गया था। संजय का कहना है जब इसकी शिकायत की तो डाक्टर प्रशांत कहने लगे गलती हो गई। जबकि ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर प्रशांत की सफाई है कि महिला गलत आरोप लगा रही है। उसकी गाल ब्लेडर और बच्चेदानी दोनों ख़राब थी इसलिए दोनों को निकाला गया। वैसे इस बात का उनके पास कोई जवाब नहीं है कि जब पहला ऑपरेशन बच्चेदानी का हुआ तो सिर्फ आधे घंटे बाद तुरंत दूसरा ऑपरेशन क्यों करना पड़ा और दोनों ऑपरेशन करने थे तो उसको वार्ड में क्यों भेजा गया था और बच्चेदानी ख़राब होने की रिपोर्ट कहा है।

वहीं डॉक्टरों की लापरवाही के चलते परिजनों ने इसकी शिकायत अस्पताल प्रशासन को दी। जहां अस्पताल प्रशासन ने अब तक इस मामले में कोई भी कार्यवाही नहीं की है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह उठता है कि जिन हाथों में हमारी जिंदगी है वह धरती के भगवान हमारी जिंदगी के साथ इस तरह खिलवाड़ कर रहे हैं।

  • कौस्तुभ शंकर मिश्रा

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