NEWS KRANTI
Latest hindi News Website

- Advertisement -

- Advertisement -

डेंगू का खतरा मंडरा रहा है दुनिया के कई देशों पर

47

दुनिया की काफी आबादी पर डेंगू का खतरा मंडरा रहा है यह बीमारी मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से होती है। बारिश में यह मच्छर तेजी से पनपते हैं। साथ ही तापमान का बार-बार से कम-ज्यादा होना और तेजी से बढ़ता शहरी एंव गांव भी डेंगू के फैलने के लिए जिम्मेदार है।क्या भारत, क्या दुनिया, हर तरफ डेंगू का खतराडेंगू ने पूरी दुनिया को चपेट में ले रखा है। इस साल फिलिपींस में इससे 1,88,000 लोग बीमार हो गए और 600 से ज्यादा को जान से हाथ धोना पड़ा। बांग्लादेश में डेंगू पीड़ितों की संख्या 50,000 पहुंच चुकी है और अगस्त मध्य तक मरने वालों का आंकड़ा 40 हो गया है। भारत के बेंगलुरू में इस साल डेंगू के 3,300 केस सामने आ चुके हैं। अन्य सबसे ज्यादा प्रभावित शहरों में बरेली,पीलीभीत देहरादून और नागपुर शामिल हैं।

क्या है डेंगू बुखार

भारत, बांग्लादेश और फिलिपींस जैसे देशों में डेंगू महामारी की तरह फैल रहा है। मानसून की बारिश के दौरान मादा एडीज एजिप्टी मच्छर खूब पनपता है। यही कारण है इस दौरान सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। लेकिन यह भी सच है कि यह बीमारी सालभर में किसी भी समय फैल सकती है।डेंगू (रक्तस्रावी वायरल बुखार) का सबसे बड़ा लक्षण है ठंड के साथ बुखार आना। इसके असर से शरीर में प्लेटलेट्स (छोटे छोटे रक्त कण जो खून का थक्का जमने में मददगार होते हैं और खून बहने नहीं देते) और सफेद रक्त कोशिकाओं की गणना से संबंधित ल्यूकोसाइट काउंट कम होते हैं। डेंगू लिवर पर अटैक करता है और शरीर में जबरदस्त दर्द होता है। डेंगू बुखार के चार प्रकार हैं । यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि एक व्यक्ति एक प्रकार के डेंगू से दो बार संक्रमित नहीं होता है। यानी यदि किसी को दूसरी बार डेंगू बुखार आया है तो उस पर दूसरे स्टीरियोटाइप का इन्फेक्शन हुआ है। डेंगू बुखार बहुत तेज हो तो उल्टी होती है। आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है। झटके भी लगते हैं। इसे डेंगू शॉक सिन्ड्रॉम कहा जाता है।डेंगू का इलाजडेंगू का कोई इलाज नहीं है। विभिन्न दवा कंपनियों ने वैक्सीन बनाई हैं, लेकिन वे क्लिनिकल ट्रायल के स्तर पर हैं। मई 2019 में यूएस फूड एंड्र ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन ने एक डेंगू वैक्सीन को मंजूरी दी, लेकिन उस पर कई तरह की शर्तें भी लगाई हैं। फिलिपींस में इस साल हालात बिगड़ने के बाद वहां की सरकार ने पांच वैक्सीन को मंजूरी दी, लेकिन वे सभी क्लीनिकल ट्रायल पर ही हैं। 1 अगस्त 2019 को लेंसेट चाइल्ड एड्लोसेंट हेल्थ मैग्जीन में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, NIH डेंगू वैक्सीन जल्द ही क्लिनिकल ट्रायल के चरण से बाहर हो सकती है।रोकथाम ही सबसे बड़ा इलाजडेंगू का सबसे बड़ा इलाज यही है कि मच्छरों से खुद को बचाया जाए। आमतौर पर जो सलाह दी जाती है उनमें शामिल हैं – अपने आसपास के स्थानों पर सफाई रखें, पानी जमा न होने दें, मच्छर पनप चुके हो तो खुद को बचाएं। पूरे शरीर को ढंकने वाले कपड़े पहनें। डेंगू के लक्ष्ण नजर आएं तो क्या करेंयदि किसी व्यक्ति में डेंगू जैसे लक्षण नजर आते हैं तो वह तत्काल डॉक्टर से मिलें। उसकी सलाह पर ब्लड टेस्ट कराएं। घबराएं नहीं। आराम करें। अधिकांश मामलों में डेंगू का असर एक समय तक ही रहता है। हफ्ते या 10 दिन बाद हालात अपने आप सामान्य होने लगते हैं। फिर भी किसी भी वायरल फीवर की तरह इस दौरान शरीर को हाइड्रेटेड रखें यानी पानी भरपूर पीएं

- Advertisement -

डेंगू का बुखार, नियम-मानक तार-तार

डेंगू बुखार का मौसम आ गया है। शुरुआत से ही इसके मामले सुनाई देने लगे हैं। निजी चिकित्सक नियम और मानकों के विपरीत मरीजों को गुमराह कर रहे हैं।पिछले कुछ सालों से जहां डेंगू आम लोगों के लिए दहशत बना हुआ है। वहीं, निजी चिकित्सा क्षेत्र में यह बड़ा बिजनेस बनकर उभरा है। डेंगू के खौफ में मोटी कमाई की जाती है। निजी डॉक्टर मनमाने ढंग से मरीजों को डेंगू घोषित कर देते हैं। एनएस-1 रैपिड टेस्ट पॉजिटिव और प्लेटलेट्स काउंट कम होने पर मरीज और उनके परिजनों को भयभीत कर दिया जाता है। जबकि डेंगू की पुष्टि के लिए यह टेस्ट पर्याप्त नहीं हैं।इसके बावजूद निजी पैथोलॉजी लैब और डॉक्टरों के यहां हर रोज चार-छह मरीजों को डेंगू बताया जा रहा है।निजी चिकित्सकों के मुताबिक इनमें से आधे मरीज डेंगू के माने जा सकते हैं।अगर बुखार आ रहा है तो फौरन सरकारी अस्पताल से जांच कराकर दवा ले।अस्पतालों मे डेंगू आदि से अच्छी दवा दी जा रही है।ध्यान रखे झोलाछाप डाक्टर से बिल्कुल बुखार बगैरा की दवा न ले बरना आपके जान पर आ सकती है।

  • रिपोर्ट ज़ाहिद अली

Loading...

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.