ढाई दशक के बीच सूबे की फेल हो चुकी है स्थानांतरण नीति

by News Desk
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कौशाम्बी :- बेरोजगारों को रोजगार दिलाने का झांसा देकर पिछले ढाई दशक से उद्योग विभाग में डी आर मिश्रा की लूट का खेल बेखौफ चल रहा है। बेरोजगार तो रोजगार नहीं पाते हैं और बेरोजगार दो जून रोटी के लिए परेशान है।

लेकिन बेरोजगारों को रोजगार दिलाने का झांसा देकर मिश्रा ने करोड़ों की बेनामी संपत्ति अर्जित की है लेकिन उद्योग विभाग में बेरोजगारों को झांसा देकर लूटने वाले इस कर्मचारी के कारनामे को विभाग से लेकर शासन प्रशासन ने मामले को संज्ञान नहीं लिया है जिससे मिश्रा की लूट आज भी कायम है।



बेरोजगारों का आवेदन बैंक पहुंचाना है इस बात का ठेका भी मिश्रा लेकर उनसे मोटी रकम वसूल लेता है। आवेदन पत्र देने के नाम पर भी मिश्रा ने ढाई दशक से बेरोजगारों से रकम वसूली है।

अब ऑनलाइन आवेदन फार्म जमा कराने के नाम पर फिर प्रत्येक बेरोजगार से दो सौ तीन सौ रुपये की वसूली वह खुलेआम विभाग में कर रहा है। जिला उद्योग केंद्र कार्यालय में प्रतिदिन कई दर्जन लोग आवेदन करने आते हैं जिनसे दो सौ तीन सौ रुपए ऑनलाइन फॉर्म भरने के नाम पर मिश्रा द्वारा वसूली की जाती है।


सूत्रों की माने तो पहले भी दस बीस हजार रोज की वसूली मिश्रा के जेब में होती थी और अभी भी मिश्रा की जेब में दस बीस हजार की वसूली हो रही है।


विभाग में वसूली होने पर उपायुक्त ने रोक लगाने का प्रयास किया जिस पर मिश्रा बाबू ने उन्हीं के खिलाफ साजिश रचना शुरु कर दिया है। ढाई दशक के बीच सूबे की स्थानांतरण नीति पूरी तरह से फेल हो चुकी है। जिससे मिश्रा बाबू का स्थानांतरण विभाग से नहीं हो सका है। एक सीट पर ढाई दशक से जमे रहना उत्तर प्रदेश सरकार की व्यवस्था के मुंह पर तमाचा है।


उत्तर प्रदेश सरकार का कोई भी कानून मिश्रा पर लागू नहीं हो सका है। आखिर एक सीट पर ढाई दशक से बेरोजगारों से लूटने वाले मिश्रा बाबू को विभाग के किस अधिकारी का अभय दान प्राप्त है। इसके चलते इनका ढाई दशक से स्थानांतरण नहीं हो सका है और यह एक सीट पर ढाई दशक से जमे हुए हैं यह भी एक बड़ा जांच का विषय है।



इन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारी की जांच हुई तो उस बड़े अधिकारी पर भी शासन की गाज गिर सकती है। सपा बसपा सरकार में बेरोजगारों को लूटने वाले मिश्रा बाबू के कारनामे को क्या सूबे की योगी सरकार संज्ञान लेगी या फिर मिश्रा की लूट का खेल इसी तरह विभाग में चलता रहेगा यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। इस बारे में विभागीय अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन मोबाइल फोन ना उठने से बात नहीं हो सकी है।



रिपोर्ट श्रीकान्त यादव

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