दुनिया के दुश्मन नहीं मित्र होते हैं सर्प

by News Desk
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इटावा :- वर्ल्ड स्नेक डे (विश्व सर्प दिवस) है यह दिन सर्पो के प्रति जागरूकता व उनके प्रति हमारा दृष्टिकोण बदलने का दिन भी महत्वपूर्ण दिन है। जैसा कि हम सब जानते है कि, देवाधिदेव महादेव के प्रिय गण ये विषैले सर्प उन्हें बेहद प्रिय है तभी उन्होंने इन्हें अपने कंठ में स्थान देकर सुशोभित भी किया है।

अर्थात ये जीव महादेव के श्रंगार अंश के रूप में हमारे सम्माननीय भी है। हम सब जानते है कि, सर्प हमारे साथ अनादिकाल से ही धरती पर हमेशा से रहते चले आ रहे है फिर भी इनके अस्तित्व पर अब हम लोग ही खतरा बनकर सामने आ रहे है।

अक्सर हम अपने आस पास दिखने वाली बड़ी चीजों पर ही ध्यान देते हैं। लेकिन, हमारे छोटी चीजें और लापरवाही हमारी जान ज्यादा लेती हैं। जैसे अब कोरोना वायरस को ही ले लीजिये जिस वायरस को हम देख भी नहीं सकते उसने ही तबाही मचा दी अब उसके प्रभाव से दुनिया की गति रुकी हुई है। सारा विश्व आज एक अनजान समस्या से त्रस्त है।

अब देखा जाये तो जब भी इंसान और जीवो के बीच अपने अस्तित्व को लेकर द्वंद की बात आई है तब हमारा ध्यान कुछ बड़े जीव जैसे शेर हाथी भालू या तेंदुआ पर गया है। लेकिन यदि विचार किया जाये तो इंसानों की सबसे असल लड़ाई तो इन छोटे से रेंगने वाले सर्पों के साथ ही ज्यादा गतिमान है क्यों कि, ये सर्प सभी जगह मौजूद है।आंकड़े की बात करें तो बीते कुछ बीस सालों में भारत में लाखों मौत सर्पदंश से हुई है।


भारतीय सहित अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने अपनी इस रिपोर्ट को ई-लाइफ जर्नल में प्रकाशित करने के साथ मिलियन डेथ स्टडी के डाटा का इसमें प्रयोग किया गया है। अब जरा सर्पदंश से होने वाली मौतों के कारणों पर एक नजर डालिये।

अक्सर सर्पदंश से होने वाली आधी से ज्यादा मौतें जून से सितंबर तक चलने वाली बरसात के समय ही होती हैं। क्योंकि इस समय सांपों के बाहर निकलने की गतिविधि बढ़ जाती है। और ज्यादातर लोगों के संपर्क में आने पर अक्सर पैरों में कोई सांप काट लेता है। मरने वालों में भी 30 से 65 साल के लोग होते है।

जबकि, कभी कभी बच्चे भी सर्पदंश का शिकार हो जाते हैं। अक्सर गांवों या शहरों में ज्यादातर मौत रसल वाइपर, करैत और कोबरा के काटने से होती है। यदि सर्प जहरीला नही भी है तो ज्यादातर मौत ड्राई बाइट के भय से भी मरीज के कार्डियक अरेस्ट से ही हो जाती है।


इनमें से बहुत सारी मौतें सिर्फ इसलिए भी होती हैं कि, घटना स्थल से आकस्मिक चिकित्सा सेवा व्यवस्था बहुत दूर होती है और लोगों को सर्प दंश का इलाज सही समय से नहीं मिल पाता है। साथ ही कुछ अनपढ़ लोग नीम हकीम झाड़ फूंक के चक्कर मे भी अपने प्रियजन की जान से खिलवाड़ करते नजर आते है।


आपको बता दूं कि, दुनियाँ भर में रसल वाइपर आमतौर पर बेहद आक्रामक सांप माने जाते हैं और भारत के तमाम हिस्सों में पाए भी जाते हैं। अक्सर चूहों की तलाश में ही ये इंसानों के घरों के करीब आते हैं। जिसका परिणाम इंसान और सांप का आपसी जानलेवा द्वंद होता है। जहरीला करैत या कोडिया गढ़ा सर्प दिन में छिपा रहता है। लेकिन,रात्रि में इसका व्यवहार अचानक बदल जाता है।


वहीं दूसरा खतरनाक कोबरा सर्प या काला नाग आमतौर पर दिन और रात दौनो समय काटता हैं और विष से भी हमारी नसों में इंटरनल ब्लीडिंग व तंत्रिका तंत्र फेल होने की क्रिया शुरू होने लगती है। काटने के तुरंत बाद ही इलाज की आवश्यकता भी बेहद जरूरी होती है।


अध्ययन में आया है कि, वर्ष 2001 से 2014 के बीच सर्पदंश से होने वाली सत्तर फीसदी मौतें सिर्फ आठ राज्य—बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, ओडीशा, उत्तर प्रदेश, आंध्राप्रदेश (तेलंगाना भी), राजस्थान और गुजरात शामिल में हुई है। सर्पदंश का सबसे ज्यादा खतरा किसानों को ही होता है।

थोड़ी सी जागरुकता बढ़ाकर और कुछ आसान तरीके अपनाकर सर्पदंश होने से बचा जा सकता है। जिसमे रबर के बड़े बूट, हाथ में रबर के दस्ताने और टार्च का इस्तेमाल सांप काटने से होने वाली मौत से हमे बचा सकता है।

दुनिया भर में हर साल हजारों लोग सर्पदंश से मरते हैं जिनका आंकड़ा लाखों में होता है,उनमें से बहुत सारे ऐसे भी होते है जिनकी जान तो बच जाती है लेकिन वे हमेशा के लिए तांत्रिक तंत्र के खराब हो जाने से विकलांग भी हो जाते हैं। अब इन तमाम बातों के बावजूद भी सांप किसानों के मित्र होते हैं।

क्यों कि वे इस धरती के ईकोसिस्टम में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आये हैं। किसानों के सबसे बड़े दुश्मन चूहे जैसे बेहद तेज प्राणी व अन्य नुकसान पहुचाने वाले जीवों का वे सफाया करके उपज की मात्रा बढ़ाते हैं। सर्पो की सभी प्रजातियां जहरीली नहीं होती।

इसलिए हमे अब जागरूक होने व अपनी नई पीढ़ी को भी जागरूक करने की बेहद आवश्यकता है। इसी क्रम में एक दशक से भी ज्यादा वर्षों से जनपद इटावा में वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के लिये कार्यरत संस्था (ओशन) ऑर्गनाइनेशन फ़ॉर कन्जर्वेशन ऑफ एनवायरनमेंट एंड नेचर के महासचिव, डॉ आशीष त्रिपाठी द्वारा आयोजित सर्प मित्र कार्यशाला के माध्यम से विभिन्न स्कूलों व कॉलेजों में इन बेजुबान सर्पो को बचाने के उद्देश्य से एवम लोगो का इन जीवों के प्रति दृष्टिकोण बदलने के लिये लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

रिपोर्ट शिवम दुबे

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