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धारा 144 के तहत ऐरा प्रथा की रोकथाम हेतु प्रतिबंधात्मक आदेश जारी

मध्य प्रदेश::-रीवा जिले में आवारा पशुओं से फसलों की क्षति व सार्वजनिक स्थलों में पशुओं के यत्र तत्र घूमने के कारण होने वाले नुकसान की रोकथाम के उद्देश्य से दण्ड प्रक्रिया सहिंता 1973 की धारा 144 (2) के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। आदेश में कहा है कि जिले के सीमा में मवेशियों को बिना चरवाहे के छोड़ने की ऐरा प्रथा के कारण पशुओं के यहां-वहां घूमने व किसानों की फसलों को नष्ट होने से पशुओं के साथ क्रूरता की जाती है। सड़क मार्ग में पशु दुर्घटनाग्रस्त होकर मृत अथवा घायल हो जाते हैं, इससे लोगों की आस्था पर चोट पड़ती है और कानून व्यवस्था की समस्या बनती है। इसके अलावा दुर्घटनाओं में वाहन चालक भी घायल और मृत हो रहे हैं। ऐसी दुर्घटनाओं के बाद आसपास के सैकड़ों लोग हाइवे जाम कर देते हैं और परिवहन व आवागमन प्रभावित होता है। उपरोक्त स्थित के मद्देनजर अपने आदेश में कहा है कि पशुपालन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी नवंबर 2019 से जनवरी 2020 तक पशु पालक के घर-घर जाकर पशुओं की टैगिंग करेंगे। जिससे यह पता चलेगा कि संबंधित पशु का मालिक कौन है। पशु पालकों द्वारा अपने पशुओं को ऐरा छोड़ने तथा दुर्घटना होने को क्रूरता मान्य करते हुये उनके विरूद्ध पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के तहत प्रकरण दर्ज कराया जायेगा। ग्रामों में पराली जलाने तथा हार्वेस्टर से कटाई कराने के कारण भूसे की कमी हो रही है और पशु भूखे भटक रहे हैं। पराली जलाने को पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया है साथ ही हार्वेस्टर की अनुमति उसी शर्त पर दी जायेगी जब उसके साथ भूसा कटाई की मशीन जैसे रीपर का प्रयोग किया गया हो अर्थात भूसा कटाई मशीन के बिना हार्वेस्टर का प्रयोग पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। यह प्रतिबंधात्मक आदेश जिले की सीमाओं के भीतर तत्काल प्रभाव से लागू होकर 17 दिसंबर 2019 तक प्रभावशील होगा। पशुपालक कृषकों व अन्य संबंधितों से इस प्रयास में सहयोग की अपेक्षा है। इसके विपरीत आचरण पर आदेश का उल्लंघन माना जायेगा। संवाददाता::-संजीव कुमार ( रीवा म प्र )

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