निजी अस्पतालों में मरीजो के अधिकार व जबाबदेही तय होः देवेन्द्र गाँधी

by News Desk
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हमीरपुर :- आक्स्फैम और हैल्थ वाच फोरम के द्वारा उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य अभियान के तहत निजी अस्पतालों में मरीजो  के अधिकार अस्पतालों की जबाबदेही एवं क्लीनिकल इस्टेबलिसमेन्ट एक्ट 2010 के क्रियान्वयन के लिये जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा हैं।


15 अगस्त से संचालित इस अभियान के तहत ग्राम कुतुबपुर खोड में देवेन्द्र गाँधी ने कहा कि निजी स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजो के अधिकारों का हनन किया जा रहा हैं। उनका आर्थिक शोषण किया जाता है। गैर जरूरी उपचार एवं जरूरत न होने पर भी अनेक प्रकार के टेस्ट कराये जाते हैं।

महंगी दवाईया दी जाती है। भारत में हर साल 4 करोड लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं में खर्च के कारण गरीबी रेखा के नीचे ढकेला जाता है। दूसरी तरफ अच्छे डाक्टर व छोटे अस्पताल वाले भी तेजी से फैलते हुए बाजारीकरण व निजीकरण की बजह से त्रस्त है। ऐसे मे निजी अस्पतालों पर नियंत्रण रखने की जरूरत है।


उन्होने कहा कि हमारा मानना हैं कि इस तरह की परिस्थतियों को बदलने के लिये हमें सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना होगा। निजीकरण को आवश्यक रूप से रोकना होगा। निजी स्वास्थ्य सेवाओं का सामाजिक तौर पर नियमन करना आवश्यक हैं।

ग्राम खरौंज , रिठारी , चकोठी में लोगो को संबोधित करते हुए दिव्या व् सुनील कुमार ने कहा की निजी अस्पतालों में मरीजो के अधिकार सुनिशिचित किया जाये , निजी अस्पतालों में मरीजो के अधिकार व जबाबदेही को लेकर आयाजित किये जाने वाले अभियान के समर्थन में उपस्थित लोगो ने हस्ताक्षर करते हुए कहा।

कि – निजी अस्पतालो में मरीजो के अधिकार को लेकर अस्पतालो की जबाबदेही तय हो।
– निजी अस्पतालों के नियंत्रण हेतूं उत्तर प्रदेश में क्लीनिकल इस्टैब्लिस्मेंट एक्ट 2010 का क्रियान्वयन सुनिश्चत किया जाए।


-राष्ट्रीय मानवाधिकार  आयोग द्वारा प्रेषित हैल्थ चार्टर को उप्र में लागू किया जाए।
-मरीजो के हक को सुनिशिचित करने के लिये प्राविधान हो तथा निजी अस्पतालो में मरीजों के अधिकारों को उलघन होने पर शिकायत दर्ज करने को फोरम बनाया जाए।

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