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पोकलैण्ड से नहीं भरी जायेंगी घाट से मौरम, होगी कार्यवाही- डीएम

उरई। बालू ढुलाई के लिए जो पोकलैंड का इस्तेमाल किया जाता है उस पर पाबंदी लगा दी गई है। अगर कहीं पर इसका उपयोग हुआ तो उसके खिलाफ कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। इतना हीं नहीं ओवरलोड माल देने पर खनन पटटाधारक के खिलाफ कार्यवाही के साथ-साथ उसका पट्टा निरस्त किया जायेंगा। आज थाना दिवस के अवसर पर डकोर में जिलाधिकारी डा.मन्नान अख्तर, पुलिस अधीक्षक डा.सतीश कुमार द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीणों की थाना में शिकायतें सुनी गई जिसमें दस शिकायतें आई और मौके पर ही आठ शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया। खनन एक, तीन व पांच लगें धर्मकांटे और सीसीटीवी कैमरे को भी मौंके पर जाकर खंगाला गया और उन्हें निर्देश जारी किए गए कि एनजीटी द्वारा जो भी निर्देश दिए गए है उसका शत प्रतिशत पालन कराए। कानून से खिलबाड करने का प्रयास न करें। ओवरलोड माल न दे, धर्मकांटा लगा हुआ है इसमें जो मानक शासन द्वारा तय किए गए है उसका शत-प्रतिशत पालन कराया जाये। अगर किसी ट्रक में ओवरलोड पाया जाता है और किस खनन से भरा गया, एमएम 11 से मिलान किया जायेगा, मिलान में सही पाया गया तो उसका पटटा निरस्त किए जाने की कार्यवाही की जायेेगी। यह जानकारी डकोर इंस्पेक्टर वीएल यादव द्वारा अवगत कराई गई है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने खनन संचालक को अपनी मंशा बता दीं है और इसी अनुसार उन्हें कार्य करने के निर्देश दिए गए है। पोकलैंड जो कि ग्रीन ट्रिब्यूनल के अनुसार नहीं चलाई जा सकती है। मशीनो से भरने का कहीं कोई प्रावधान नहीं किया गया है परन्तु ठेकेदार अपनी मनमर्जी से इसका प्रयोग करते है और जिससे जहां नदी का संतुलन बिगड़ता है वहीं क्षेत्रीय लोग रोजगार से वंचित रह जातें है। पहले हजारो की संख्या में क्षेत्रीय मजदूर डलियो से बालू ट्रको में लोड़ करते थे और किसी भी तरह की कोई मशीन नदी के अंदर नहीं चलती थी। जिससे न तो बेतवा की धार रोकी जाती थी और न ही कहीं अवरोध पैदा होते थे। इन कड़े निर्देशो से जहां खनन संचालको में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। वहीं धर्मकांटा और कैमरा लगने से अगर वों अवैध रूप से खनन करते है तो वों भी उनकी स्थिति उजागर होने की पूरी संभावनाएं है। चूंकि ओवरलोड़ के कारण जहां क्षेत्र से लेकर शहर के मुख्य मार्ग ध्वस्त हो गए थे और खनन संचालको के लिए पोकलैंड वरदान साबित हो रही थी। रात के अंधेरे में वो बेतवा का सीना चीरकर नदी से वो बालू का खनन करते थे और सुबह होते ही अपनी ईमानदारी की छवि शासन के सामने बनाने का प्रयास करते थे। चूंकि अब मौंके पर डीएम-एसपी स्वत: निगरानी रखने पहुंच गए है। संभवत: यह पहली बार देखने को मिला है कि डीएम-एसपी ने स्वयं वास्तविकता खंगालने का प्रयास किया है। निश्चित तौर पर उनके इस प्रयास एक नहीं कई समस्यायें जो क्षेत्र में पैदा हो रही है उन पर अंकुश लगेगा साथ हीं जो ओवरलोड के कारण किसानो की बोई फसले तबाह हो रही थी वों भी सुरक्षित रहेंगी। घाट से बालू निकालकर चलने वाले ट्रक जिनका संतुलन बिगडा रहता था और दुर्घटनायें घटित होती थी। खासतौर पर कालपी में जाम जैसी विकराल समस्या खडी हो जाती थी अब यह समस्यायें स्वत: खत्म हो जायेगी। निश्चित तौर पर शासन और प्रशासन की अच्छी पहल है जो सार्थक होती दिखाई पड़ेगीं।
  • रिपोर्ट :-: मनोज कुमार शिवहरे

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