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बरसात के समय जलभराव से गांव की सड़कें से निकलना हो जाता तो दुश्वार

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उरई (जालौन)- शासन द्वारा जारी किए गए निर्देश पर जनपद प्रदेश देशभर में चेकिंग अभियान चलाकर जो लोग हेलमेट नहीं लगाये सीट बेल्ट नहीं लगाएं कागज नहीं लिये ऐसे कई चीजों पर जुर्माना लगाया जा रहा और उनसे शुल्क भी वसूला जा रहा लोगों की सुरक्षा के लिए यह सब किया जा रहा ताकि उनकी जान सुरक्षित रहे और कानून द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करें लेकिन सवाल ये उठता है नियमों का पालन तब किया जाएगा जान जब सुरक्षित रहेगी जब जनपद की सड़कें ठीक हो बताते चलें की जिला जालौन जनपद के अंदर की गांव की सड़कों की हालत बद से बदतर है गांव से ज्यादा शहर की सड़कें जर्जर हो चुकी और आए दिन हादसे हो रहे लोगों का बरसात के समय घर से निकलना भी दुश्वार हो जाता सिर्फ सामान शुल्क वसूलने से लोगों की जान बच सकती है या कानून के नियमों का पालन हो सकता क्या उन्हें सही सड़क देकर सही सुरक्षा नहीं दी जा सकती सही सड़क देखकर सभी नियमों का पालन नहीं कराया जा सकता गांव की सड़कों की हालत बद से बदतर है कई जगह तो अभी सड़के बनी नहीं और जहां बन गई तो वह भी जर्जर हो चुकी क्योंकि सड़क भी लीपापोती वाली बनी थी जो साल 2 साल में ही जर्जर हो गई सड़कों के ऊपर सवाल जब जनता से पूछे गए तो उनका भी यही कहना था कि हमें जुर्माना देने में तकलीफ तब ना हो जब सड़क हमें सही मिले और कानून के नियम का पालन करवाने वाले चौकीदार भी ईमानदार मिले रिश्वतखोरी और जर्जर सड़कों पर जुर्माना देने में भी दिक्कत होती

उरई शहर की ज्यादातर सड़कें गड्ढा युक्त

उरई शहर जनपद जालौन का मुख्यालय होने के साथ-साथ यहां पर बड़े-बड़े आला अधिकारी और बड़े-बड़े नेताओं के निवास भी हैं रोज चेकिंग भी लगाई जाती और जो शासन प्रशासन द्वारा बनाए गए नियमों का पालन नहीं करता तो उन लोगों से जुर्माना भी वसूला जाता जिन सड़कों पर खड़े होकर आला अधिकारी लोगों से जुर्माना वसूलते और कानून का पाठ पढ़ाते उन सड़कों को देखा जाए तो उन गड्ढा युक्त और जर्जर सड़कों पर चलना भी दुश्वार है से शिकायत सालों से होती चली आ रही पर ना तो उन सड़कों पर कोई सुनवाई हुई ना उन सड़कों की हालत सही हुई गोलू हिमांशु जीतू सिंह कुशवाह संदीप शिबू श्याम जी आदि लोगों ने कहा कि इन जर्जर सड़कों पर जब प्रशासन मोटी रकम में जुर्माना वसूला है तो कम से कम इन को भी तो ठीक करें ताकि सड़कों पर चलने से कोई हादसा ना हो जगह शासन कहता है कि लोगों की सुरक्षा के लिए नियमों को पालन कराया जा रहा जब सड़क ही ठीक नहीं है तो लोगों की कहां से सुरक्षा हो जाएगी

आए दिन शिकायत के बाद भी हालात जस के तस

ग्राम आटा के ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत करने के बाद ही प्रशासन कोई सुनवाई नहीं कर रहा गांव में सड़क नाम के लिए सिर्फ कच्ची सड़के हैं और जो प्रशासन द्वारा बनाई गई थी सड़के उसमें ज्यादातर सड़कें जर्जर गड्ढे युक्त बरसात के समय सड़के तालाब का रूप ले लेती और घर से निकलना मुश्किल हो जाता है वही गांव के निवासी राकेश, रामनरायन, प्रेम , श्यामबाबू, शिवशंकर देवीदयाल मुन्ना तुलसीराम, खेमराज, रोशन खां, दसरथ,आदि लोगों ने प्रशासन के खिलाफ कड़ी नाराजगी जाहिर कि और कहा जब शासन प्रशासन जुर्माना लेने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ता तो सड़क बनवाने के लिए भी पीछे नहीं हटना चाहिए जब प्रशासन सड़क सुरक्षा की बात करता है तो जब जर्जर सड़क होंगी उन पर सुरक्षा कैसे मिलेगी

बरसात के दिनों में बच्चे नहीं जा पाते स्कूल

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कोंच तहसील क्षेत्र के ग्राम भेंड से धनौरा मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुका पहले तो लोगों को कच्ची सड़क पर कीचड़ और बरसात के पानी का सामना करना पड़ता था जब सड़क बन गई तो वह भी बनने के एक दो साल में जर्जर और गड्ढा युक्त हो गई यहां पर लोगों को कई हादसों का सामना करना पड़ता और कई बार हादसे हो भी चुके तब भी प्रशासन ने जर्जर और गड्ढे युक्त सड़क पर ध्यान नहीं दिया बही भदेवरा से अटा गाँव का मार्ग भी गड्डो मे तब्दील हो चुका बरसात के समय इन सड़कों पर स्कूल के बच्चे, सरकारी अध्यापक व सफाई कर्मचारी निकलना दुश्वार हो जाता है अगर कहीं ज्यादा बरसात हो गई तो यहां की सड़कें पूरी तरह बरसात के पानी की भर जाती है और लोगों का निकलना बंद हो जाता योगेश पटेल योगी ,धर्मेंद्र कुमार ,अन्नू कुमार, उत्तर पटेल, राजवीर ,मिथुन पटेल, रामजी निरंजन, सम्भू व्यास आदि ग्रामीणों ने कहा कि शासन द्वारा सड़कों पर चलने के नियमों का पालन तो बहुत कराया जा रहा लेकिन सड़क में भी ठीक कराई जाएं आए दिन हादसों का कारण खराब सड़क है ना कि हेलमेट अगर सड़के सही होंगी तो हादसे भी बहुत कम हो जाएंगे हमारे गांव की सड़कों की हालत बहुत बुरी है कई बार शिकायत भी की बरसात के दिनों में बच्चे स्कूल नहीं जा पाते पर कोई बार शिकायत भी की पर इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा

चालान से नहीं सही सड़कों से होंगे हादसे कम

व्यापारी और युवा समाजसेवी विकास पुरवार जी का कहना है कि हादसे जुर्माना या चालान काटने से कम नहीं होते सड़के अगर जनपद की सही हो तो उनसे लोगों की जान भी सुरक्षा होगी और हादसे भी कम होंगे जब शासन कह रहा है कि लोगों की सुरक्षा के लिए यह कड़े नियम बनाए गए तो लोगों की सुरक्षा के लिए सड़कें भी बनवानी चाहिए ताकि लोगों की जान सुरक्षा हो सके और जब सड़के सही होंगे तो लोगों को जुर्माना देने में भी कोई तकलीफ नहीं होगी आज पूरे शहर और गांव की सड़कों की हालत पर ध्यान देना चाहिए फिर कानून और नियमों पर

सड़क सही हो तो जुर्माना देने में नहीं होती तकलीफ

लोगों से पूछे गए कई सवालों में लोगों के ज्यादातर एक जवाब थे कि अगर सड़क सही हो तो जुर्माना देने तकलीफ नहीं होती ऐसा ही इस सवाल पूछा गया युवा समाजसेवी अक्षय शुक्ला नदीगांव उन्होंने कहा कि वैसे तो हम जब बाइक चलाते तो हेलमेट और कागज ड्राइवर लाइसेंस साथ में लेकर चलते हैं लेकिन अगर कभी कबार भूल गए तो अगर जुर्माना देना पड़े तो इतनी परेशानी ना हो अगर जनपद में बनी सड़क सही हो हमें गांव से रोज जाना उरई रहता हमारे गांव की सड़क से आना जाना बहुत मुश्किल है गड्ढा युक्त सड़कों से निकलना भी मुश्किल हो जाता बरसात के दिनों में बड़ी तकलीफ होती क्योंकि गांव से शहर आने के लिए बाइक से आना पड़ता है लेकिन गांवों से आते समय बाइक भी नहीं निकल पाती सरकारें जुर्माना तो बहुत ले रही लेकिन उसके साथ-साथ सड़के भी सही कराना चाहिए क्योंकि जर्जर सड़कों पर जुर्माना देने का कोई मतलब नहीं

खबर-नसीम सिद्दीकी

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