बालिका जागरूकता सप्ताह शुरू

by vaibhav

हमीरपुर । समर्थ फाउण्डेशन एवं सहयोग संस्था के संयुक्त तत्वाधान में जागरूकता अभियान सप्ताह से शुरू हो गया , जो कि 18 अक्टूबर तक चलेगा ।जागरूकता अभियान के तहत ग्राम बरूआ, भीतरी, खरौज, कुतुबपुर, शिवनी गाॅवों में किशोरियों को जेण्डर भेदभाव, शिक्षा व किशोरावस्था में स्वास्थ्य के मुददे पर जागरूक किया गया। समर्थ फाउण्डेशन के देवेन्द्र गाॅधी ने कहा कि इसको मनाने का उद्देश्य लोगों को इस बात के लिए जागरूक करना है। लड़कियों को भी समाज में उतनी ही अधिकार और इज्जत देनी चाहिए, जितनी लड़को को मिलती है। लड़कियों का भी पूरा अधिकार बनता है कि वह समाज में अपनी बात को रख सकें, और उन पर हो रहे किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें। इसके लिये सभी को जागरूक होने की जरूरत हैं। लडकियों को कुशल बनना होगा। उन्होने बताया कि वर्ष 2001 व 2011 के जनसंख्या के आकड़ों के मुताबिक देश में 0 से 6 साल की साढे पाॅच करोड लडकियों कम हैं। यह घटता लिंगानुपात धातक हैं। बालिका शिशु के साथ भेद-भाव एक बड़ी समस्या है जो कई क्षेत्रों में फैला है , जैसे शिक्षा में असमानता, पोषण, कानूनी अधिकार , चिकित्सीय देख-रेख, सुरक्षा, सम्मान, बाल विवाह पर भेदभाव प्रमुखता से देखने को मिलता हैं। हालाकि देश मे बैटी बचाओं बेटी पढाओं जैसे सार्थक प्रयासो के परिणाम परिलक्षित हो रहें हैं । फिर भी लडकियों के साथ हो रहे जेण्डर भेदभाव को मिटाने के लिये और अधिक प्रयास करने होगे। आज समय की माॅग हैं कि हमारे अभिभावक भी बालक व बालिका में भेदभाव न करते हुए दोनो को समान परिवरिश एवं शिक्षा के क्षेत्र में बराबरी का अधिकार देते हुए बेटियों को भी आगे बढाने मे सहयोग करना चाहिए। किशोरियों व किशोंरों के साथ कार्य रही समर्थ फाउण्डेशन की उर्मिला ने बताया कि लडकियों को शिक्षित बनना होगा। पढने व जागरूक होने के अवसर तलाशने होगे। कुशल बनकर अपनी जीवन में बदलाव के लिये पहल खुद करनी होगी। किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन के प्रति लडकों व लडकियों दोनो को सजग होना होगा। वही लडकियों को गुड टच (अच्छा स्पर्श) ओर बेड टच (बुरा स्पर्श) को समझना होगा। हर उस गलत काम का विरोध करना होगा, जो उनको अधिकारों से वंचित रखें। उन्होंने बताया कि जिले में वन स्टाप सेन्टर संचालित किया जा रहा हैं। उत्पीडन की शिकार होने वाली महिलाए व किशोरियाॅ पुलिस हेल्पलाइन 112, वूमेन पावर हैल्पलाइन 1090 अथवा वन स्टाप सेन्टर पर अपनी सीधी शिकायत कर न्याय के लिये पहल कर सकती हैं। यहां कल्पना, सजल, संगम देवी, सोनम देवी, बन्दना, पायल, सरिता प्रमुख रूप से उपस्थित रही।

पानी के बोझ में छूट रही पढाईः
ग्राम बरूआ की नौबस्ता मुहल्ला की कल्पना, सजल ने बताया कि उनके मुहल्ले में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नही हैं। पीने के पानी के लिये कई घंटों मशक्त करनी पडती हैं , जिसके कारण वह स्कूल समय से नही जा पाती हैं,और उनकी पढाई छूट जाती हैं। उन्होने अपने मुहल्ले में पीने के पानी हेतु हैण्डपम्प लगवाने या पीने के पानी के लिये इन्तजाम करने की बात की।

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