उज्जैन :- सत्संग के श्रवण और अनुसरण करने से ही मनुष्य जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। सत्संग श्रवण का लाभ मनुष्य जीवन में ही मिलता है, क्योंकि मनुष्य में ही श्रवण करने की शक्ति है। अनुसरण करने की शक्ति है।


चारधाम मंदिर स्थित प्रवचन हाल में गुरुपूर्णिमा महोत्सव के दौरान श्रीमद्भागवत कथा में भरत प्रसंग के दौरान चारधाम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी श्री शान्ति स्वरूपानंद गिरिजी ने कही। स्वामी जी ने आगे कहा कि वासना के कारण ही हम जन्म-मृत्यु के चक्र में उलझे रहते हैं।

इसलिए जो सत्संग का अनुसरण करते हैं, मृत्यु का भय नहीं रहता, जो अन्त समय में ईश्वर का स्मरण करते हैं, उनको मोक्ष प्राप्त होती है। कथा के चौथे दिन 21 जुलाई को श्री कृष्ण जन्मोत्सव धार्मिक परम्परानुसार मनाया जाएगा।

कथा में कोरोना के दौरान दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई। कथा में कोरोना गाइड लाइन का पालन किया जा रहा है। कथा के यजमान बाबूलाल नामदेव, आशा नामदेव, वेदप्रभाकर द्विवेदी और मृदुला द्विवेदी ने आरती की। जानकारी पं. रामलखन शर्मा ने दी।

रिपोर्ट आसिफ खान