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महालनोबिस ने विदेशो में भारत की पताका फहराई

by vaibhav
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हमीरपुर । जिला विज्ञान क्लब ने भारत को विश्व के सांख्यिकी मानचित्र के केंद्र में ला खड़ा करने वाले मनीषी/ महान भारतीय वैज्ञानिक एवं आंकड़ों के जादूगर प्रो प्रशांत चंद्र महालानोबिस का जन्म दिवस मनाया । जिला विज्ञान क्लब के जिला समन्वयक डॉ जीके द्विवेदी ने बताया कि प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालानोबिस का जन्म 29 जून 1883 में कोलकाता के संभ्रांत ब्रह्म समाज परिवार में हुआ था ।उनके पिता प्रबोध चंद्र एक सफल व्यवसाई थे ।माता मृदु भाषिनी ,प्रसिद्ध फिजीशियन ,शिक्षाविद एवं उद्यमी सर नीलरतन सरकार की बहन थी। छह भाई-बहनों में प्रशांत चंद्र सबसे बड़े थे ,उनकी प्रारंभिक शिक्षा ब्रह्मी बॉयज स्कूल में हुई फिर सन 1912 में प्रेसिडेंसी कॉलेज से फिजिक्स में ऑनर्स बीएससी की उपाधि प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए शीघ्र ही कैंब्रिज गए वहां उन्होंने 1914 में मैथमेटिक्स (ऑनर्स )का पार्ट और 1915 में फिजिक्स (ऑनर्स )पार्ट कॉलेज द्वारा सम्मानित किया गया । कोलकाता के प्रेसिडेंसी कालेज में प्रवक्ता पद पर नौकरी मिल गई ,उन्होंने 1915 में इंडियन एजुकेशन सर्विस आईएस में भाग लिया । उन्हें वहीं भौतिकी के प्राध्यापक का पद मिल गया ,बाद में वे प्रेसिडेंसी कालेज के प्रिंसिपल बन गए और अंत तक कार्य करते हुए 1948 में वही से सेवानिवृत्त हुए ,उन्होंने कहा कि यद्यपि सांख्यिकी उस समय नहीं था, परंतु महालनोबिस सांख्यिकी यानी स्टैटिसटिक्स में विशेष रूचि रखते थे ।इस विषय में अध्ययन के लिए उन्हें बचपन से जानने वाले डॉक्टर रविंद्र नाथ ठाकुर कोलकाता विश्वविद्यालय में दर्शन शास्त्र के प्राध्यापक बृजेंद्र नाथ सिंह और उनके मामा सर नीलरतन सरकार ने उन्हें प्रोत्साहित किया ।27 फरवरी 1923 को महालनोबिस का विवाह निर्मल कुमारी से हुआ। कोलकाता विश्वविद्यालय मैं प्रोफेसर महालनोविस के निर्देशन में सांख्यिकी में1945 में शांति की एक अलग विषय बना दिया गया ।केंद्रीय सांख्यिकी संगठन बना अंततः सांख्यिकी विभाग का गठन हुआ ।सन 1954 में तत्कालीन प्रधानमंत्री और योजना आयोग ने महालनोविस से अपने संस्थान में राष्ट्रीय आय बढ़ाने और बेरोजगारी की समस्या हल करने का प्रयास किया । सेंट्रल एक्ट 1959 के अधीन संस्थान को संत की उपाधि प्रदान करने की अनुमति मिल गई ।उन्होंने बताया कि अपने कार्यकाल के दौरान वे कई विशिष्ट पदों पर रहे कोलकाता में उन्होंने मौसम विज्ञानी 1922 से 26 तक के रूप में कार्य किया विश्वविद्यालय में सांख्यिकी विभाग के विभागाध्यक्ष 1943 तक तथा पश्चिम बंगाल सरकार के सलाहकार 1948 तक रहे ।58 तक वे भारतीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष रहे ।उन्हें भौतिक विशेष बना दिया । उनके संस्थान में उनके साथ जेएम सेनगुप्ता ,आर सी बोस, एसएनरे भी थे । प्रोफेसर महालनोबिस का नाम अमर कर रही हैं ।

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