गोण्डा:- पुलिस विभाग में छुट्टी को लेकर आए दिन तमाम तरह की घटनाएं और शिकायतें सामने आती रहती हैं। पुलिसकर्मियों को छुट्टी के लिए कोतवाल व थानाध्यक्ष से लेकर सीओ सहित अन्य आला अफसरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस बाबत शासन के स्पष्ट निर्देश और गाइडलाइन भी हैं, लेकिन इसके बाद भी ‘सिस्टम’ जस का तस बना हुआ है। यही वजह है कि पुलिसकर्मी तनाव एवं अवसाद के शिकार होकर खतरनाक कदम तक उठा लेते हैं।गोण्डा जिले की मनकापुर कोतवाली में तैनात महिला कांस्टेबल वंदना भट्ट ने जब बुधवार को पुलिस अधीक्षक के नाम इस्तीफा लिखा और यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो महकमे में हड़कंप मच गया। महिला कांस्टेबल ने इस्तीफे की वजह अवकाश न मिलना बताया। उसने लिखा कि उसकी तबीयत खराब है। स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण उसे ड्यूटी करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इलाज के लिए अपने घर जाना चाहती है लेकिन मनकापुर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक द्वारा उसे अवकाश नहीं दिया जा रहा है।सवाल यह उठता है कि शासन के साथ ही आलाधिकारियों के स्पष्ट निर्देश के बावजूद आखिर किन परिस्थितियों में मनकापुर कोतवाल ने महिला कांस्टेबल को इलाज कराने के लिए घर जाने की छुट्टी नहीं दी? हद तो यह है कि अपनी तानाशाही के लिए चर्चित मनकापुर कोतवाल केके राणा महिला सशक्तिकरण की धज्जियां उड़ाने में जरा सा भी नहीं हिचकिचाते हैं।बताते हैं कि जिले के थानों, कोतवालियों व पुलिस चौकियों पर तैनात पुलिसकर्मियों को छुट्टी के लिए साहब के सामने गिड़गिड़ाना पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत महिला पुलिसकर्मियों को होती है लेकिन उनकी दिक्कतों और परेशानियों को समझने वाला कोई नहीं है!

रूचि मोदी ने एडीजी से की बात

जिले की चर्चित समाजसेविका रूचि मोदी ने आज इस संबंध में देवीपाटन परिक्षेत्र गोण्डा के डीआईजी डॉ. राकेश सिंह व एडीजी जोन गोरखपुर अखिल कुमार से फोन पर वार्ता कर सिस्टम पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा तथा अन्य जरूरतों के दृष्टिगत स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए, जिससे महिला पुलिसकर्मियों का किसी भी तरह का शोषण न हो सके। रूचि मोदी ने बताया कि दोनों अधिकारियों ने इस मामले में उचित कार्रवाई एवं अवकाश को लेकर ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया।

रिपोर्ट राहुल तिवारी जिला संवाददाता गोंडा