गोण्डा:- मामला गोंडा जिले के थाना मोतीगंज का जहां पर एक पीड़िता अपनी फरियाद लेकर मोतीगंज थाना प्रभारी के पास पहुंचती है। महिला ग्राम पंचायत मंगरांवा की रहने वाली है, पीड़िता मंनू देवी अपने बहुओं के साथ रहती है व उसके लड़के रोजी रोटी के जुगाड़ के लिए गैर राज्य में मजदूरी करते हैं।

महिला के पड़ोसी रामाशंकर ओझा उसकी आबादी की जमीन पर अवैध छप्पर रखना चाहते हैं। इसी बात के लिए पुलिस से मदद मांगने महिला तहरीर लेकर थाने पहुंचती थी । उसे उम्मीद थी कि भाजपा की सरकार है न्याय ज़रूर मिलेगा, लेकिन भ्रष्टाचार की चासनी में जब सरकारी कर्मचारी नहाया हो तो उसे न सरकार की साफ सुथरी मंशा की चिंता होती है ना ही उच्च पदस्थ अधिकारियों के मान मर्यादा का ख्याल ही रह जाता है। ठीक ऐसा ही महिला के साथ हुआ। पीड़िता के तहरीर पर जब दोनों पक्षों को थाने पर बुलाया गया तब विपक्षी गण जो वर्तमान प्रधान प्रतिनिधि के खासम खास हैं वह अब तक थाना प्रभारी के खासम खास बन चुके थे और थाने में पहले से ही कुर्सियों की शोभा बढ़ा रहे थे। पीड़ित महिला जैसे ही थाने में पहुंची थानाध्यक्ष महोदय उस पर गालियों व धमकियों की बौछार कर दिए और यह कहते हुए कि प्रधान जैसा कहेंगे वैसा ही होगा।

चुपचाप इन लोगों को छप्पर रखने दो नहीं तो इतना मुकदमा लाद दूंगा कि बर्बाद हो जाओगी। इतना सुनकर मंजू देवी के पैरों के नीचे से जमीन सरक गयी। कहाँ वह पीड़िता न्याय की आस लेकर आई थी और कहाँ जज का रूप धारण करके बैठे इस अभद्र थानाध्यक्ष ने अपना फैसला सुना दिया। महिला रोती हुई घर आ गई। मामला कई दिनों तक पड़ा रहा और वही हुआ जिसका महिला और उनके परिवारी जनों को डर था। पुलिस ने फर्जी तरीके से मनगढ़ंत कहानी बनाते हुए पीड़िता मंननू देवी के लड़कों पर विभिन्न धाराओं में एन.सी.आर दर्ज कर दिया ताकि दबाव में आकर महिला अपनी पुश्तैनी जमीन पड़ोसी को दे दे।

गावँ के लोगों से पड़ताल करके यह जानने का प्रयास किया कि गया क्या गाँव में किसी भी प्रकार की घटना जैसे कि मार पीट या कोई अन्य विवाद हुआ है?

लेकिन हमारे पास इस बात के साक्ष्य मौजूद हैं कि गाँव में कोई ऐसी घटना हुई ही है। केवल जमीन पर कब्जा दिलवाने के लिए विपक्षी गण, प्रधान प्रतिनिधि व वर्दी पहनते हुते संविधान की शपथ लेकर कसम खाने वाले थाना प्रभारी और ग्राम प्रधान ने साज़िशन एक कपोल कल्पित कहानी के आधार पर गोण्डा के थाना मोतीगंज में पीड़ित परिजनों पर एन.सी.आर दर्ज कर दिया गया है।

पीड़िता ने अब कप्तान साहब से मिलकर अपनी पूरी आप बीती सुनाई व न्याय की गुहार लगाते हुए एक प्रार्थना पत्र भी दिया है।

अब देखना यह है कि गरीबों की जमीन का कब्जा करवाने, फर्जी मुकदमे में फंसाने व महिला के साथ को अभद्र आमर्यादित व्यवहार करने वाले थानेदार इसी तरह क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों व सरकार की मंशा पर पानी फेरने के लिए अपनी सेवा जारी रखते है अथवा न्याय के लिए जाने जाने वाले गोंडा पुलिस अधीक्षक संतोष मिश्रा ऐसे थानेदार पर क्या कार्यवाही करते हैं?

रिपोर्ट : राहुल तिवारी