लखनऊ। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के तत्वावधान में वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. कन्हैया सिंह (आजमगढ़) का अभिनन्दन एवं उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केन्द्रित अभिनन्दन ग्रंथ ‘काली मिट्टी पर पारे की रेखा’ का लोकार्पण मुख्यमंत्री एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के अध्यक्ष योगी आदित्यनाथ एवं विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने मुख्यमंत्री आवास पर किया।

अतिथियों का स्वागत करते हुए हिन्दी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डाॅ. सदानन्दप्रसाद गुप्त, ने कहा कि डाॅ. कन्हैया सिंह, एक निष्ठावान, सतत सक्रिय रचनाकार हैं। वे वास्तव में ‘काली मिट्टी पर पारे की रेखा’ की भांति भी साहित्य में अपनी उपस्थिति अंकित करते हैं। वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. कन्हैया सिंह ने कहा कि मा. मुख्यमंत्री जी का साहित्यप्रेम अद्भुत है और उसकी सराहना चहुओर हो रही है।

सभाध्यक्ष श्री हृदय नारायण दीक्षित, मा. अध्यक्ष, विधान सभा, उत्तर प्रदेश ने कहा कि जिस देश के सर्जक जितना काम करते हैं, उसे देश की संस्कृति उतनी ही अधिक ज्ञानवर्द्धक होती है। हमारे देश की साहित्य परम्परा अत्यंत समृद्ध है। साहित्य मनीषियों को समय-समय पर स्मरण करते रहना चाहिए। हमारे देश की संस्कृति साहित्य से ही चलती है।

मा. मुख्यमंत्री जी ने कहा – डाॅ. कन्हैया सिंह गोरक्षपीठ की परम्परा से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने जिस क्षेत्र में कार्य किया है। वह अत्यंत अभिनंदनीय है। पेश से विधि प्रवक्ता के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरूआत करने वाले डाॅ. कन्हैया सिंह क्रमशः साहित्यिक सामाजिक गतिविधियों को उत्तरोतर आगे बढ़ाते रहे हैं। उन्होंने अपने को कभी भी छुपाया नहीं, वे जैसे थे वैसे ही अपने को प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डाॅ. कन्हैया सिंह द्वारा सृजित तीन पुस्तकें – आलोचना के प्रत्यय, इतिहास और विमर्श, गोरखनाथ जीवन और दर्शन तथा संस्मरणों का आलोक का भी लोकार्पण हुआ। अभ्यागतों के प्रति आभार संस्थान के निदेशक श्रीकान्त मिश्रा द्वारा व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. विनम्र सेन सिंह ने किया।