Home Featured लॉक डाउन में व्यापारी ईमानदारी तो चूहे निभा रहे थे खलनायक की भूमिका

लॉक डाउन में व्यापारी ईमानदारी तो चूहे निभा रहे थे खलनायक की भूमिका

by vaibhav
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उरई(जालौन):- लॉक डाउन लगा हुआ है, लॉक डाउन के चलते सभी व्यापार बंद थे। दुकानों में ताला डाला हुआ था।क्योंकि प्रधानमंत्री द्वारा अपील और आदेश दिया गया था, कि जब तक लॉक डाउन लगा हुए है। तब तक सारे व्यापार दुकानें बंद रखी जाएंगी। जिसके देखते हुए सारे व्यापारियों दुकानदारों ने उनके आदेश का पालन किया और अपील को सर्व मान्य माना। इमरजेंसी सेवाओं और राशन कि दुकानों को छोड़कर पूरा भारत लगभग 2 महा बंद रहा। वहीं जब लॉक डाउन-4 लगा तो केंद्र सरकार द्वारा लोगों को कुछ रियायत दी गई। जिसमें सारे व्यापारी कुछ गाइडलाइन के अनुरूप अपनी दुकानें और व्यापार चला सकते हैं। जब राज्य सरकार और जिला प्रशासन द्वारा व्यापारियों को दुकान खोलने की इजाजत दी गई तो उन्होंने लगभग 2 माह बाद जब अपनी दुकानें खोली तो वह हक्का-बक्का रह गए। क्योंकि 2माह दुकान ना खुलने से वह पहले से ही व्यापार में घाटा खाए बैठे थे। और सामान खराब होने से उनको और नुकसान का सामना करना पड़ा। वहीं यह नुकसान चूहों के सामान काटने से हुआ। तो कुछ सामान तो 2 माह तक इस्तेमाल ना होने से हो गया। लॉक डाउन में जहां व्यापारी ईमानदारी की भूमिका निभा रहे थे। तो वही चूहे खलनायक की भूमिका में नजर आ रहे थे। जब व्यापारियों ने 2 माह बाद अपनी दुकान खोली तो जिसमें आधा सामान तो एक्सपायरी डेट के अनुसार खराब हो गया तो वही कपड़ा व्यापारी से लेकर किराना, पुस्तक अन्य व्यापारियों का सामान चूहों ने काटकर खराब कर दिया था क्योंकि कपड़े ब्रांडेड महंगे होने कारण अगर चूहों ने एक भी कपड़ा काटा तो उससे हजारों का नुकसान होता है, वहीं तालाब पर लेडीस लहंगा व्यापारियों द्वारा बताया गया की उन्होंने जब 2 माह बाद दुकान खोली तो देखा कि चूहों ने उनके लगभग लाखों के लहंगे कतर कर खराब कर दिए। व्यापारी पहले से ही लॉक डाउन के चलते घाटे में जा पहुंचे। अब जब उन्होंने दुकान खोली और साफ-सफाई की तो देखा कि चूहों ने यह हरकत की। वहीं मिठाई व्यापारी द्वारा बताया गया कि 2 माह दुकान ना खुलने कारण उनकी ज्यादातर मिठाई और जो रोज मर्रे का अन्य सामान रखा था। वह खराब हो चुका है।वहीं कुछ व्यापारियों ने चोरी चुपके दुकान खोल कर अपना सामान निकाल कर उसे बचा लिया। लेकिन रेड जोन के अंतर्गत आने वाली दुकानों का ज्यादातर सामान खराब हो चुका है। और वही अगर देखा जाए तो अभी सिर्फ वही दुकान खोली गई है, जो रेड जोन के बाहर है। रेड जोन के आने के अंतर्गत आने वाली ज्यादातर दुकानें अभी बंद है, उनके खुलने के बाद पता चलेगा कि आखिर उनका कितना नुकसान हुआ। पुस्तक व्यापारियों द्वारा बताया गया कि चूहों ने उनकी जो महंगी किताबे थी उन्हें भी नहीं बक्सा उनको भी काट दिया। पुस्तक व्यापारियों को भी हजारों रुपए का नुकसान हुआ। वहीं कपड़ा वालों को तो लगभग लाखों का नुकसान हुआ। अगर एक छोटा सा अनुमान लगाया जाए तो लगभग जनपद में व्यापारियों को लाखों रुपए का नुकसान सिर्फ चूहों और सामान खराब हो जाने के कारण हुआ।

  • रिपोर्ट :- नसीम सिद्दीकी

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