गोंडा। सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टोरलेन्स की नीति को फेल करते हुए ग्राम प्रधान व प्रतिनिधि द्वारा बिना कार्य कराए ही कागजो में खानापूर्ति कर करीब 58 लाख रुपये का भुगतान करा लिया गया।
जिसकी शिकायत जिले के उच्च अधिकारियों से की गई है।
जिसके बाद प्रधान व सचिव ने आनन फानन में कार्य तो शुरू कराया लेकिन सभी मानकों को ताख पर रखकर।
मामला गोण्डा जनपद के विकासखण्ड वजीरगंज का है।
जहां ग्रामसभा महादेवा में बिना कार्य कराए अनियमित भुगतान के सम्बंध में राम बरन द्वारा शपथ पत्र के साथ उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई है।
ग्राम सभा मे पुलिया निर्माण,आरसीसी व इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण के नाम पर बिना कार्य कराए चार साल पहले ही लाखो का भुगतान करा लिया गया।
शिकायत के बाद उच्च अधिकारियो को भनक लगते ही प्रधान व सचिव ने आनन फानन में कार्य तो शुरू करा दिया लेकिन पुलिया व खड़ंजे के निर्माण में मानक विहीन दोमा व पीले ईंट का प्रयोग किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यो में न तो गुणवत्ता के मानकों का ध्यान दिया जा रहा है न ही ग्रामसभा के मनरेगा मजदूरों को कार्य पर रखा जा रहा है।
बाहरी मजदूरों व ठेकेदारों द्वारा कार्य को किसी तरह से पूरा कराकर निकाली गई रकम को एक बार फिर से हड़पने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं ग्रामीणों का कहना है प्रधान व रोजगार सेवक एक ही घर के होने से यहां विकास कार्यो की पूरी रकम बिना कार्य कराए ही हड़प ली जाती है।
जानकारी के लिए आपको बता दें कि वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में शीतला प्रसाद यहां के प्रधान निर्वाचित हुए थे।इनके बेटे फौजदार जोकि इस ग्रामसभा के रोजगार सेवक हैं यही प्रधान प्रतिनिधि के रूप में कार्यभार देख रहे थे।
2020 के पंचायत चुनाव में रोजगार सेवक की माँ सुषमा देवी प्रधान पद के लिए निर्वाचित हुई।
जबकि शासन का निर्देष है कि ग्राम प्रधान के घर का कोई भी सदस्य इस पद पर नही रह सकता लेकिन विकासखण्ड में सभी नियमो निर्देशों को ताख पर रखकर कार्य हो रहा है।
प्रकरण में जब खण्ड विकास अधिकारी शेर बहादुर सिंह बात की तो उन्होंने बताया कि जिले से लेटर आया था जिसपर जांच कमेटी गठित की गई।जल्द ही जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।

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