NEWS KRANTI
Latest News In Hindi

संपादकीय : हंगामा है क्यों बरपा !

63

महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव के नतीजे आने के बाद 50-50 फार्मूला काम न आने पर शिवसेना ने 25 साल पुराने साथी बीजेपी से गठबंधन तोड़ लिया और कांग्रेस, एन सी पी के साथ गठबंधन करके सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और आज सदन में बहुमत भी साबित कर दिया |

शिवसेना के कांग्रेस और एन सी पी के साथ गठबंधन करने पर भारतीय जनता पार्टी और बीजेपी समर्थकों द्वारा शिव सेना और उद्धव ठाकरे पर सिद्धांतों से समझौता करने, हिंदुत्व की राह छोड़कर सेक्युलरिज़्म के रास्ते पर चलने का आरोप लगाया जा रहा है | इससे भी आगे बढ़ते हुए बीजेपी समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया पर उद्धव ठाकरे को सोनिया गाँधी की फोटो के आगे झुकते और बाला साहेब की फोटो को रोता हुआ दिखाकर उन्मादी प्रचार किया जा रहा है |

तमाम टीवी डिबेटों में बीजेपी प्रवक्ता शिव सेना पर दग़ाबाज़ी का आरोप भी लगा रहे हैं | हालाँकि सत्ता के लिए पुराना गठबंधन तोड़ना और नए दलों के साथ जाना या पूरा ही नया गठबंधन बना लेना कोई नई बात नहीं है | और सीधी बात ये भी है कि हम किसी पर आरोप तब लगा सकते हैं जब हम खुद सैद्धांतिक तौर पर उसूलों का या खुद के बनाये गए मापदंडों का पालन करें | और राजनीति में कोई सत्संग करने नहीं आता है, कुर्सी हर राजनीतिक दल की महत्वाकांक्षा होती है |

हिंदुस्तान के राजनीतिक परिदृश्य को देखा जाए तो दोनों प्रमुख पार्टियां बीजेपी और कांग्रेस मौके की नज़ाकत को देखते हुए हर उस दल के साथ समझौता करती नजर आई हैं जिनके ख़िलाफ़ उन्होंने चुनाव लड़ा था | जम्मू-कश्मीर में दो धुर विरोधी दल और विपरीत धारा वाले बीजेपी और पीडीपी भी आपस में गठबंधन कर चुके हैं, हालाँकि भाजपा समर्थकों द्वारा तब भी भाजपा के ही पक्ष में कुतर्क दिए गए थे |

महाराष्ट्र में मामला सरकार न बन पाने से ज़्यादा बीजेपी की ईगो न सैटिस्फाई होने का है | दरअसल बीजेपी ने जिस तरह गोवा में सरकार बनाने का मौका लपका था और महाराष्ट्र में भी रातों रात राष्ट्रपति शासन हटाके फडणवीस की ताजपोशी कराई गई थी, वो भी उसी एनसीपी के समर्थन से जिसके नेता अजित पवार को फडणवीस चुनाव के दौरान जेल भेजने की धमकी देते थे | उन्ही अजित पवार ने फडणवीस के साथ तब उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली जब आधा हिंदुस्तान सो रहा था | आखिर ऐसी कौन सी आपात स्थिति आ गई थी कि सारे क्रिया कलाप रातों रात और तड़के सुबह करवाए गए |

आज अगर बीजेपी शिवसेना को लानत भेज रही है और बाला साहब के उसूलों की दुहाई दे रही है तो उसको खुद देखना चाहिए कि यही बीजेपी पीडीपी के साथ सरकार चला चुकी है | हालाँकि हर कोई अपने गुनाहों को छुपाने के लिए एक अच्छा वकील होता है | मगर जो हंगामा आज शिव सेना की गठबंधन सरकार के लिए मचाया जा रहा है वो सिर्फ इसलिए कि बीजेपी को राज्यों में अपना जनाधार खिसकता दिख रहा है | साथ ही लोकतंत्र के लिए एक ही पार्टी के बजाय अलग अलग पार्टी की सरकारें होना एक अच्छा लक्षण है, इससे कुछ हद तक निरंकुशता पर रोक लगती है | हालाँकि कोई भी राजनितिक दल हो बेसिक पॉलिसी सबकी लगभग एक ही होती हैं, या ये भी कहा जा सकता है जैसा अरविन्द केजरीवाल ने एक बार कहा था कि “सब मिले हुए हैं जी” |

Loading...

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.