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‘सब्ज़ीकोठी’ से ‘कैंपस हाट’ तक सभी स्टार्टअप ने दिखाया अपना दम

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सुदूर गाँवों के किसानों की सब्ज़ियों को सहेजकर रखने से लेकर बड़े शहरों के बड़े बड़े काॅलेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट हो या फिर चाहे मेट्रों स्टेशन पर फंसे किसी व्यक्ति की वाशरूम की समस्या को हल करना हो। सबका निदान कानपुर आईआईटी में आयोजित स्टार्टअप एक्सपो ‘ अभिव्यक्ति’ में देखने को मिला। कैपस में आयोजित स्टार्टअप एक्सपो में सभी नये स्टार्टअप ने अपने प्रोटोटाइप के साथ पूरी जानकारी देते हुए अपने उत्पाद प्रदर्शित किये।

किसानों के लिए वरदान साबित होगी ‘सब्जीकोठी’
दूर दराज के गाँवों में रहने वाले किसानों को उनकी सब्जियों को कई दिनों तक सहेजकर रखने के लिए सब्जीकोठी को इजाद किया गया है। सब्जी कोठी के फाउंडर निक्की ने जानकारी देते हुए बताया कि फ्रिज या कोल्डस्टोरेज की अपेक्षा बेहद सस्ते इस उत्पाद में बिना किसी केमिकल की मदद से फलों व सब्जियों की उम्र 40 दिनों तक बढ़ाई जा सकती है। पूरे दिन में महज एक लीटर पानी का उपयोग कर इस कोठी में एक बार में 400 किलों तक के फल व सब्जियों को रखा जा सकता है। हालांकि अभी इसकी कीमत 10 हजार रुपये है, अगर सरकार इसमें सब्सिडी देती है तो इसे बेहद कम दाम में किसानों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है।

कालेज हाट दिखायेगा स्टूडेंट को रास्ता
बड़े स्कूल काॅलेजों में दाखिला लेने के बाद वहां के हाॅस्टल, कैफेटेरिया व अन्य जरूरी चीजों की जानकारी जुटाना नये विद्यार्थियों के लिए बेहद कठिन काम होता है। ऐसे में विद्यार्थियों की मदद करने के लिए आईआईटी कानपुर के छात्रों द्वारा बनाया गया आॅनलाइन प्लेटफार्म कालेज हाट विद्यार्थियों में बेहद लोकप्रिय हो रहा है। स्टार्टअप के फाउंडर अक्षत श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया किवर्तमान में यह ऐप आईआईटी, कानपुर विश्वविद्यालय , एचबीटीयू सहित कई बड़े संस्थानों में उपयोग किया जा रहा है।

स्मार्ट टाॅयलेट बनायेगा स्वच्छ भारत
प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को साकार करने के लिए गर्व टाॅयलेट अपना पूरा योगदान दे रहा है। स्टील से बने पूरे टाॅयलेट को आसानी से साफ सुधरा रखा जा सकता है, साथ ही ज्यादा इस्तेमाल होने पर इसमें टूट फूट की भी संभावना नहीं रहती है। गर्व टाॅयलेट के संस्थापक मयंक ने जानकारी देते हुए बताया कि आईओटी इनेबल इन स्मार्ट टायलेट से सभी जगह की साफ सफाई, टाॅयलेट में पानी की उपलब्धता को सुनिश्चित करना आसान हो जायेगा। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि अभी देशभर में 800 टाॅयलेट स्थापित किये जा चुके है। मयंक ने जानकारी देते हुए कहा कि इन टाॅयलेट से निकलने वाले वेस्ट को बायोकंपोजिट एवं चारकोल पाउडर बना कर फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है।

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