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सिनेमा, संन्यास और राजनीति

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कुलदीप कुमार ‘निष्पक्ष’

हैंडसम हंक विनोद खन्ना का जन्म हुआ था 6 अक्टूबर 1946 को पेशावर में। इनके पिता कृष्णचंद्र खन्ना का टेक्सटाइल, डाई और केमिकल का कारोबार था।

कृष्णचंद्र की कुल पांच संतान थी। जिनमे 2 लड़के और 3 लड़कियां। विभाजन के दौरान विनोद का परिवार पहले मुंबई शिफ्ट हुआ इसके बाद पूरा परिवार दिल्ली में आकर बस गया।

विनोद ने मुंबई के प्रसिद्ध क्वीन मेरी स्कूल, सेंट जेवियर्स हाई स्कूल और फिर दिल्ली के दिल्ली पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की थी। कुछ साल दिल्ली में रहने के बाद पुनः इनका परिवार मुम्बई जा बसा।

लेकिन विनोद मुम्बई की जगह नासिक गये बोर्डिंग स्कूल में। और यहीं से बॉलीवुड के सपने संजोने लगे।

फिल्मों में पहली एंट्री मिली ‘मन का मीत’ फिल्म से। इस फिल्म में उनको विलन का रोल मिला था। इस फिल्म के बाद उन्होंने पूरब और पश्चिम, सच्चा झूठा, आन मिलो सजना, मस्तानी और मेरा गांव मेरा देश जैसी ब्लॉक बस्टर फ़िल्में की।

फिल्मों में ज्यादातर या तो वह विलेन बने या सपोर्टिंग एक्टर।

बतौर अभिनेता पहला अवसर दिया गुलज़ार ने अपनी फिल्म ‘मेरे अपने’ से, इस फिल्म में गुलज़ार ने उस दौर के दो विलन विनोद और शत्रुघ्न को बतौर अभिनेता लीड रोल दिया। ये फिल्म बहुत हिट हुई। फिल्म के साथ उसके गीत और अभिनय की काफी प्रशंसा हुई। इस फिल्म के साथ ही विनोद खन्ना आने वाले समय के एक स्टार होने के संकेत देने लगे थे।

दो साल बाद फिर गुलज़ार ने अपनी फिल्म ‘अचानक’ में विनोद को बतौर लीड हीरो कास्ट किया। यह फिल्म मुंबई के मशहूर नानावटी केस से प्रेरित थी और विनोद इसमें नेवल ऑफिसर कावस नानावटी बने थे। इस फिल्म में निभाया गया उनका किरदार काफी चर्चा में रहा।

अमिताभ बच्चन के साथ विनोद खन्ना ने अस्सी के दशक में हेरी फेरी, खून पसीन, अमर अकबर एंथनी और मुकद्दर का सिकंदर फिल्में जैसे सफल की। इस दौरान विनोद खन्ना अमिताभ को टक्कर देने लगे थे।

लेकिन अचानक ही वे कैरियर के इस बेहद महत्वपूर्ण समय पर सब कुछ छोड़कर भगवा चोला ओढ़कर, ओशो के अनुयायी बन गये। वे 5 साल तक सन्यासी का जीवन जिये।

इस दौरान वे ओशो के बागों की रखवाली करते थे। 5 साल संन्यासी जीवन बिताने के बाद 1987 में उन्होंने दुबारा सिनेमा के क्षेत्र में कदम रखा ‘इंसाफ’ फिल्म से।

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मुजफ्फर अली ने विनोद खन्ना और डिंपल कपाड़िया के साथ मिलकर फिल्म बनाई थी ‘जूनी’। ये आज तक रिलीज नहीं हुई।

विनोद ने 1997 में बेटे अक्षय खन्ना को बतौर प्रॉड्यूसर फिल्म ‘हिमालय पुत्र’ से बॉलीवुड में लांच किया फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हुई। विनोद ने इस फिल्म में एक्टिंग भी की थी।

विनोद ने पाकिस्तानी फिल्म गॉड फादर में भी लीड रोल किया था। 2007 में रिलीज हुई यह फिल्म काफी सफल रही थी।

बीजेपी सांसद स्मृति ईरानी जब टीवी की दुनिया में सक्रिय थीं, तब उनके प्रॉडक्शन हाउस ने एक सीरियल बनाया था ‘मेरे अपने’ इसमें विनोद खन्ना काशीनाथ के लीड रोल में थे।

1997 में विनोद खन्ना ने बीजेपी ज्वाइन की। अगले साल यानी 1998 में वह पंजाब के गुरदासपुर से पहली बार सांसद चुने गये।

1999 में दोबारा जीतने के बाद वह वाजपेयी सरकार में राज्यमंत्री बने।

2004 में उन्होंने जीत की हैट्रिक बनाई, मगर 2009 में वह चुनाव हार गये थे।

विनोद खन्ना ने गीतांजलि से 1971 में शादी की। उनके दो बेटे हैं। राहुल खन्ना और अक्षय खन्ना। शादी के कुछ साल बाद एकतरफा फैसले के चलते उनकी शादी पर संकट आ गया। और 1987 में विनोद फिल्मी दुनिया में वापस लौट आये, मगर उनके गीतांजलि के साथ रिश्ते तकरीबन खत्म हो चुके थे। इसलिए दोनों के बीच तलाक हो गया।

1990 में विनोद खन्ना ने कविता से शादी की। कविता से उनके दो बच्चे हैं साक्षी और श्रद्धा।

जीवन के अंतिम कुछ सालों में विनोद ने दबंग, कोयलांचल और हीरोपंथी फिल्म में काम किया था। विनोद को पहला फिल्म फेयर अवॉर्ड सहायक अभिनेता का 1975 में ‘हाथ की सफाई’ फिल्म के लिये मिला।

1999 में उन्हें फिल्म फेयर का लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला था। लंबे स्वास्थ समस्याओं के चलते 27 अप्रैल 2017 को मुम्बई में इस सदाबहार अभिनेता का निधन हो गया।

जयंती पर हैंडसम हंक विनोद खन्ना को विनम्र श्रद्धांजलि..!

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