कहते हैं राजनीति में एक हफ्ते का वक्त भी बहुत होता है चीजें बदलने के लिए..इसलिए भविष्य में क्या होगा इसके बारे में अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है..लेकिन जहां तक मैं देख पा रहा हूं इस हिसाब से 2022 में योगी और 2024 में मोदी को बहुत मुश्किल नहीं होगी..बशर्ते सेल्फ गोल ना करें..वजह बताता हूं..आज ब्रिटिश अखबार द गार्जियन में अनीश कपूर का एक आर्टिकल छपा है..सेंट्रल विस्ता बनाए जाने की तुलना तालिबान से करते हुवे मोदी सरकार के फैसले को हिंदू तालिबान कहते हुवे हेडलाइन बनाई गई है..लेखक के मुताबिक भारत की मौजूदा सांसद इस्लामिक-मुगल और ईरानी स्टाइल में बनी है..अब मोदी सरकार आधुनिक भारत की सबसे बेहतरीन मुगल डिजाइन वाली बिल्डिंग को खत्म कर नई बिल्डिंग बनाना चाहती है..

अब आप ही बताइए जिस प्रोजेक्ट की परिकल्पना कांग्रेस ने की थी..जिस पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट भी मुहर लगा चुके हैं..उस प्रॉजेक्ट को पूरा करने के लिए इसकी तुलना तालिबान से की जा रही है..अच्छा आपको मोदी से नफरत है तो उसे जो कहना है कहिए..अब इसमें हिंदू काहे घुसेड़ दिया ? पूरा आर्टिकल झूठ और अर्ध सत्य से भरा है..सोचिए द गार्जियन अखबार की क्या एडिटोरियल पॉलिसी होगी जो हिंदू तालिबान समेत झूठ से भरे आर्टिकल को हरी झंडी दे दी.. मैं हमेशा से कहता हूं मोदी के विरोधी ही मोदी की सबसे बड़ी ताकत हैं..मोदी पर हमला करते करते हिंदुओं का अपमान करते हैं..

अब हिंदू…बाकी धर्म के लोगों की तरह बम से, तलवार से, गला काटकर तो जवाब दे नहीं सकता तो वो वोट से ही जवाब देता है..एक बात और- इस आर्टिकल में अनीश कपूर ने लिखा है कि सेंट्रल विस्ता प्रोजेक्ट का डिजाइन एक थर्ड रेट आर्किटेक्ट विमल पटेल ने बनाया है..अनीश कपूर खुद भी शिल्पकार हैं..कहीं ये पेशेगत जलन तो नहीं है..अखबार ने भी लेख छापने से पहले Conflict of Intrest नहीं देखा ?

  • Deepak Joshi ( टीवी पत्रकार )