नई दिल्ली। बदलते समय के साथ युद्ध और सीमा पर होने वाली घुसपैठ के तरीके भी बदल गये है। अब ज्यादातर घुसपैठ के मामले ड्रोन के माध्यम से अंजाम दिये जाते है। लेकिन अब भारत की स्वदेशी एंटी ड्रोन तकनीकि से जैसे ही कोई ड्रोन अवैध रूप से भारतीय वायु क्षेत्र में प्रवेश करेगा, वह मार गिराया जायेगा।

इसके लिए भारतीय नौसेना ने नई दिल्ली मेंहार्ड किल और सॉफ्ट किल दोनों क्षमताओं के साथ पहले स्वदेशी व्यापक नौसेनाएंटी ड्रोन सिस्टम (एनएडीएस) की आपूर्ति के लिए नवरत्न रक्षा पीएसयू भारतलिमिटेड (बीईएल) के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं ।

नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों और डीआरडीओ के प्रतिनिधियों कीउपस्थिति में इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए। भारतीय नौसेना ने इस बारेमें निरंतर समर्थन प्रदान किया है और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और बीईएल के साथ ड्रोन विरोधी प्रणाली के संयुक्त विकास कीअगुवाई की है।

भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने वाला नौसेना एंटी ड्रोनसिस्टम (एनएडीएस) डीआरडीओ द्वारा विकसित और बीईएल द्वारा निर्मित पहलास्वदेश विकसित एंटी-ड्रोन सिस्टम है। बीईएल की कई इकाइयाँ अर्थात्बैंगलोर, हैदराबाद, पुणे और मछलीपट्टनम; और डीआरडीओ लैब, अर्थात्इलेक्ट्रॉनिक्स और रडार विकास प्रतिष्ठान (एलआरडीई), बैंगलोर; रक्षाइलेक्ट्रॉनिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला (डीएलआरएल) और उच्च ऊर्जा प्रणाली एवंविज्ञान केंद्र (सीएचईएसएस), हैदराबाद और उपकरण अनुसंधान एवं विकासप्रतिष्ठान (आईआरडीई) देहरादून; ने भारतीय नौसेना के साथ करीबी सहयोग सेदेश विरोधियों के ड्रोन खतरों का मुकाबला करने के लिए आत्मनिर्भर भारत पहलके अंतर्गत इस पूरी तरह से स्वदेशी प्रणाली को बनाया है।

एनएडीएस माइक्रो ड्रोन का तुरंत पता लगा सकता है और जाम करसकता है और लक्ष्यों को समाप्त करने के लिए लेजर आधारित मारण प्रणाली काउपयोग करता है। यह सामरिक नौसैनिक प्रतिष्ठानों के लिए बढ़ते ड्रोन खतरोंके लिए एक प्रभावी सर्वव्यापी काउंटर होगा।

ड्रोन रोधी प्रणाली को इस वर्ष पहले गणतंत्र दिवस परेड के लिएसुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए तैनात किया गया था और बाद में लाल किले कीप्राचीर से प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान इसकीतैनाती हुई थ । यह सिस्टम, जो 360-डिग्री कवरेज प्रदान करता है, इसेमोदी-ट्रम्प रोड शो के लिए अहमदाबाद में भी तैनात किया गया था।

एनएडीएस माइक्रो ड्रोन का पता लगाने और जाम करने के लिए रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/ इन्फ्रारेड (ईओ/आईआर) सेंसर और रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) डिटेक्टरों की मदद का उपयोग करता है । डीआरडीओ का आरएफ/ग्लोबलनेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम उस आवृत्ति का पता लगाता है जिसका उपयोग नियंत्रकद्वारा किया जा रहा है और फिर सिग्नल जाम हो जाते हैं । डीआरडीओ कीएंटी-ड्रोन प्रौद्योगिकी प्रणाली भारतीय सशस्त्र बलों को तेजी से सामने आतेहवाई खतरों से निपटने के लिए ‘सॉफ्ट किल’ और ‘हार्ड किल’ दोनों का विकल्पप्रदान करती है। अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के थोड़े समय के भीतर एनएडीएसके स्थिर और मोबाइल दोनों संस्करणों की भारतीय नौसेना को आपूर्ति की जाएगी।

इस अवसर पर रक्षा मंत्रालय और बीईएल के वरिष्ठ नागरिक औरसैन्य अधिकारी उपस्थित थ । बीईएल को सेना और वायु सेना के साथ भी इसी तरहके अनुबंध पर हस्ताक्षर करने हैं ।