विकास दुबे व उसके गुर्गों के शस्त्र लाइसेंस की 200 फाइलें हुई गायब, सहायक लिपिक पर दर्ज हुआ मुकदमा

by saurabh

कानपुर। बिकरु काण्ड में भले ही विकास दुबे का अंत हो गया हो लेकिन मरने के बाद आज भी विकास दुबे और सरकारी अफसरों की जुगलबंदी को लेकर एक के बाद एक नए खुलासे होते जा रहे है। ताजा मामला खुद विकास दुबे के शस्त्र लाइसेंस से जुड़ा हुआ है। शासन द्वारा जाँच की जा रही थी कि विकास दुबे के शस्त्र लाइसेंस को बनाने में संतुति किसने दी थी। जिसको लेकर एडीएम वित्त एवं राजस्व ने 23 जुलाई 2020 को पत्र लिखकर विकास दुबे के असलहों की पत्रावली मंगवाई थी। जिस पत्र को 29 जुलाई को रिसीव तो कर लिया गया लेकिन आज तक विकास दुबे के लाइसेंस की पत्रावलियां एडीएम को प्रेषित नही की गई है।

कानपुर वाला विकास दुबे … ये वो नाम है जिसे सुनने के बाद हर किसी का दिमाग सीधे बिकरु गाँव मे हुए 8 पुलिस कर्मियों की हत्या तक पहुँच जाता है।
अब आप ये सोच रहे होंगे कि विकास दुबे तो मार दिया गया था। यह बात बिल्कुल सही है कि विकास दुबे का अंत हो चुका है और विकास दुबे के अंत के बाद जमीदोज हो चुके कई राज धीरे धीरे बाहर आ रहे है।

दरअसल इस पूरे काण्ड में सबसे अहम किरदार रहे विकास दुबे के असलहों के दस्तावेजों की जाँच के लिए शासन ने निर्देश दिए थे और कानपुर प्रशासन से यह जानकारी मांगी थी कि विकास दुबे और उसके गुर्गों को शस्त्र लाइसेंस की संतुति किसने और किस आधार पर दी थी।
शासन के निर्देश के बाद कानपुर के एडीएम वित्त एवं राजस्व ने शस्त्र अनुभाग को एक पत्र 23 जुलाई 2020 को लिखा। जिसमे विकास दुबे व उसके गुर्गों से संबंधित शस्त्र लाइसेंसों की पत्रावलियां कार्यालय में मंगवाई गई। 29 जुलाई 2020 को यह पत्र शस्त्र अनुभाग द्वारा रिसीव भी कर लिया गया। बावजूद इसके दो महीने बाद भी जब पत्रवलिया एडीएम कार्यालय में नही पहुची तो जिलाधिकारी द्वारा इस मामले में सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा जाँच कराई गई। इसके बाद जो खुलासा हुआ उसने सभी अधिकारियों के होश उड़ा दिये।

दरअसल इस जाँच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि विकास दुबे का शस्त्र लाइसेंस 25 जुलाई 1997 को स्वीकृत हुआ था और जब पत्रवलिया मांगी गई तो वे रिकॉर्ड रूम से गायब थी। इतना ही नही शस्त्र लाइसेंस संख्या 131 से लेकर 330 तक कि सभी फाइलें रिकॉर्ड से गायब है। यानी कानपुर के 200 शस्त्र लाइसेंसों का कोई भी ब्यौरा शस्त्र अनुभाग कानपुर में उपलब्ध नही है।
जाँच रिपोर्ट में हुए खुलासे के बाद उस वक्त सहायक लिपिक सस्त्र अनुभाग के पद पर तैनात रहे विजय रावत की देख रेख में रिकॉर्ड होने की बात सामने आई जोकि इस वक्त शस्त्र अनुभाग से एसीएम सेकेंड के वाचक के पद पर तैनात है। जिस समय शस्त्र अनुभाग से विजय रावत का तबादला हुआ उस समय विजय रावत द्वारा किसी को चार्ज न देने के कारण उन्हें इस पूरे मामले में दोषी मानते हुए कल देर रात जिलाधिकारी कार्यालय के लिपिक वैभव अवस्थी की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने सरकारी दस्तावेजों के गबन का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

मामला मीडिया में आने के बाद अब जिला प्रशासन के भी हाथ पाँव फूल गए है। खुद एडीएम कानपुर के कहना है कि दस्तावेजो को आर्म्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट ” नेशनल डाटाबेस ऑफ आर्म्स लाइसेंस” पर अपलोड किया जा रहा था। जिसमे 200 आर्म्स लाइसेंस के रिकॉर्ड गायब है। जिसके आधार पर तत्कालीन सहायक लिपिक शस्त्र अनुभाग के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है ।

  • कौस्तुभ शंकर मिश्रा

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