40 वर्षों से हो रही रामलीला का मंचन बड़े धूमधाम से हुआ

by vaibhav

संभल में 40 वर्षों से चला आ रहा रामचरितमानस रामलीला का मंचन बड़े धूमधाम से दिखाया गया
संभल के थाना धनारी क्षेत्र गांव दिनोरा में 40 वर्षों से चली आ रही रामलीला का अध्ययन आज बड़ी धूमधाम से दिखाया गया बाहर से आए कलाकारों ने सभी भक्तों का मन मोह लिया।

आपको बता दें कि श्रीनिवास व्यास जी ने बताया आज हमारे यहां रामलीला में राम जन्म का अच्छे कलाकारों द्वारा रामचरितमानस का गुणगान किया गया था। उन्होंने बताया कि अयोध्या में राजा दशरथ के यहां भगवान राम सहित चारों भाइयों का जन्म होता है तब पंडाल में बैठे सभी भक्तों की तालियों की गड़गड़ाहट गूंजने लगी राजा दशरथ को खुशी का ठिकाना नहीं रहा तब राजा दशरथ गुरु वशिष्ठ के यहां चारों बेटों को लेकर विद्या अध्ययन कराने के लिए ले गए भगवान राम चारों भाई विद्या सीख कर घर वापस आ जाते हैं उसके बाद वन में तपस्या कर रहे मुनि विश्वामित्र को राक्षसों ने उनका यज्ञ खंडित कर दिया
और मुनि विश्वामित्र को अयोध्या में जन्मे में भगवान राम की याद आई तब मुनि विश्वामित्र राजा दशरथ के यहां पहुंचते हैं और राजा दशरथ से अपनी तपस्या राक्षसों द्वारा खंडित किए जाने की बात कहते हैं और राजा दशरथ से मुनि विश्वामित्र राम लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने को कहने लगे। तब राजा दशरथ अपने दोनों बेटे राम और लक्ष्मण देने को मना करने लगे तभी मुनि विश्वामित्र क्रोधित हो गए और गुरु वशिष्ठ के कहने पर राजा दशरथ ने मुनि विश्वामित्र के साथ भगवान राम लक्ष्मण को भेज देते हैं और बन में जाकर भगवान राम व लक्ष्मण ने उनकी तपस्या की रक्षा की और राक्षसनी ताड़का का वध किया सुबाहु को समुद्र में फेंक दिया तब मुनि विश्वामित्र भगवान राम और लक्ष्मण को लेकर आगे चलते हैं रास्ते में गौतम ऋषि की नारी अहिल्या को ऋषि के सराप से पत्थर की शिला बन गई थी वही शिला रास्ते में मिल जाती है भगवान राम के पैरों की रज से अहिल्या का उद्धार हो जाता है इस मौके पर ऋषि कुशवाहा अजयवीर सिंह यादव, प्रधान रेशपाल, खूबा राम, भूरे यादव, मनीष कुमार, आदि भक्त मौजूद रहे।

रिपोर्ट :- सीताराम कुशवाहा

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