नई दिल्ली। ज्योतिष और विज्ञान की दृष्टि से साल 2026 का फरवरी महीना बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। 17 फरवरी 2026 (मंगलवार) को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह एक ‘वलयाकार’ सूर्य ग्रहण होगा, जिसे खगोल विज्ञान की भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।
इस ग्रहण की सबसे खास बात इसका ज्योतिषीय पक्ष है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, करीब 37 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बना है जब सूर्य ग्रहण के समय शनि की राशि कुंभ में सूर्य के साथ चंद्रमा, बुध, शुक्र और राहु मौजूद रहेंगे। इससे पहले ग्रहों की ऐसी स्थिति 7 मार्च 1989 को देखी गई थी।
भारत में दृश्यता और सूतक काल
भारतीय खगोलविदों और पंचांग के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
- दृश्यता: यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस, बोत्सवाना और अमेरिका के कुछ दक्षिणी हिस्सों में दिखाई देगा।
- सूतक काल: चूंकि यह ग्रहण भारत में दर्शनीय नहीं है, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिर के कपाट खुले रहेंगे और सामान्य पूजा-पाठ पर कोई पाबंदी नहीं होगी।
सूर्य ग्रहण 2026: समय और अवधि (भारतीय समयानुसार)
| विवरण | समय |
| ग्रहण का आरंभ | दोपहर 03:26 बजे |
| ग्रहण का मध्य (पीक) | शाम 05:42 बजे |
| ग्रहण का समापन | शाम 07:57 बजे |
| कुल अवधि | 4 घंटे 31 मिनट |
राशियों पर प्रभाव: इन 5 राशियों को रहना होगा सावधान
भले ही यह ग्रहण भारत में नजर न आए, लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा। विशेष रूप से कुंभ राशि, जिसमें ग्रहण लग रहा है, वहां सावधानी की जरूरत है।
- सिंह राशि: आत्मविश्वास में कमी आ सकती है और करियर में बाधाएं संभव हैं।
- कन्या राशि: अनावश्यक खर्च बढ़ेंगे और विरोधियों से चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
- वृश्चिक राशि: पारिवारिक कलह और जमीन-जायदाद के विवादों से बचकर रहें।
- कुंभ राशि: ग्रहण इसी राशि में है, अतः मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।
- मीन राशि: मन अशांत रह सकता है, धैर्य के साथ फैसले लेना ही उचित होगा।
