लखीमपुर- खीरी । सम्पूर्णानगर जिले में तेज रफ्तार वाहनों से होने वाली घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।जिसके चलते आये दिन सड़कें खून से लाल और दर्दनाक मौतों की गवाह बन रही है। सोमवार को एक बार फिर एक तेज रफ्तार वाहन के चलते एक मासूम की टक्कर लगने से दर्दनाक मौत हो गई। जिससे परिजनों में कोहराम मच गया। घटना पास में लगी सी सी टी वी कैमरे में कैद हो गयी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना थाना संपूर्णानगर क्षेत्र के ग्राम बमनगर का बताया जा रहा है। बीते 29 मार्च को सड़क पर अपने पिता के पीछे सड़क पर भागी सुरजीत सिंह निवासी दलनगर की साढ़े 3 वर्षीय पुत्री तरनदीप कौर को बगल से आ रही तेज रफ्तार कार ने रौंद दिया। घटना को अंजाम देकर कार सवार कार लेकर मौके से रफूचक्कर हो गया।जिसके बाद बच्ची के पिता ने कार सवार का पीछा भी किया लेकिन कार सवार चकमा देकर फरार होने में कामयाब हो गया ।

घटना के बाद नन्हीं मासूम बच्ची को उसकी माँ आनन-फानन में संपूर्णानगर के पीएससी में लेकर जाया गया ,लेकिन पीएचसी में ऑक्सीजन ना होने के चलते बच्ची को परिजन पलिया के एक प्राइवेट नर्सिंग होम में लेकर गए जहां कुछ घण्टो के बाद उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद मानों परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा जिससे परिवार में कोहराम मच गया ।वहीं इस दुर्घटना की कोई भी सूचना पुलिस को नहीं दी गई ।

समय पर बच्ची को ऑक्सीजन एवं डॉक्टरी इलाज न मिलने से बच्ची की गई जान

आप सभी को यह बता दें थाना क्षेत्र सम्पूर्णानगर की आबादी लगभग 20 हजार है यहाँ एक दो नहीं बल्कि तीन पीएचसी केंद स्थित हैं परन्तु एक भी जगह आक्सीजन की व्यवस्था नहीं है।आक्सीजन की व्यवस्था तो छोड़िए इस क्षेत्र की सबसे पुरानी पीएचसी सम्पूर्णानगर है परन्तु यहाँ पिछले एक वर्ष से कोई डॉक्टर ही नहीं है। कहने को इस क्षेत्र के विधायक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि हैं।सांसद महोदय भी लोकप्रिय हैं परन्तु पीएचसी पर एक वर्ष से डॉक्टर की नियुक्ति नहीं करा सके हैं।जबकि सम्पूर्णानगर व्यापार मंडल के द्वारा डॉक्टर की नियुक्ति के लिए लोकप्रिय जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भी दिया था।कोई जनप्रतिनिधि बच्ची के परिजन को रुपये तो दे सकता है।परन्तु क्या उन पैसों से बच्ची वापिस लाई जा सकती है।आगे ऐसी परिस्थिति में समय रहते इलाज के अभाव में कोई अपना बच्चा न खोए इसलिए सम्पूर्णानगर में तत्काल डॉक्टर की व्यवस्था होनी चाहिए एवं पीएचसी पर आक्सीजन की व्यवस्था के साथ अन्य बुनियादी सुविधाएं जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराना चाहिए।

रिपोर्ट-गोविन्द कुमार