आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश): मेरठ व महोबा में उत्पीड़न से आहत अधिवक्ता ने आत्महत्या कर लिया। जिससे आक्रोशित आजमगढ़ के अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट से जुलूस निकालकर प्रदेश सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के आवाहन पर विरोध दिवस मनाते हुए अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। बता दें कि जनपद महोबा के अधिवक्ता मुकेश पाठक के विरुद्ध माफियाओं को पुलिस संरक्षण प्राप्त होने एवं माफियाओं एवं प्रशासन द्वारा किए जा रहे मेरठ के अधिवक्ता ओंकार तोमर का उत्पीड़न विधायक दिनेश खटीक व माफियाओं द्वारा किए जाने के कारण दोनो अधिवक्ताओं ने आत्महत्या कर लिया था। जनपद के अधिवक्ताओं ने बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के आवाहन पर विरोध दिवस मनाते हुए न्यायालय से एक जुलूस निकाला।

अधिवक्ताओं का जुलूस नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा और जिलाधिकारी के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। अधिवक्ताओं का कहना है कि शासन प्रशासन द्वारा आवश्यक प्रभावी कार्यवाही न किए जाने के कारण अधिवक्तागण द्वारा लाचार एवं बेबश होते हुए आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। शासन प्रशासन की उदासीनता एवं संलिप्तता तथा अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन न किए जाने के कारण अधिवक्ता आहत हंै। जिसको लेकर आज न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए सरकार से निम्न मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मृतक अधिवक्ता गण के परिवार को एक-एक करोड़ रुपया मुआवजा व मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। अधिवक्ताओं ने मांग किया कि प्रदेश के समस्त अधिवक्ता गण को सुरक्षा व सम्मान प्रदान करते हुए प्रदेश में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिवक्ता की सुरक्षा व सम्मान के प्रति प्रदेश सरकार के संवेदनशील न होने पर समस्त अधिवक्ता गण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।

रिपोर्ट : शैलेन्द्र शर्मा