जिलाधिकारी के फर्जी मुकदमे से पत्रकारों में आक्रोश

जिलाधिकारी के फर्जी मुकदमे से पत्रकारों में आक्रोश

फतेहपुर :- जनपद के जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष अजय भदौरिया के खिलाफ फर्जी मुकदमा पंजीकृत होने से पत्रकारों में बेहद आक्रोश है| इस मामले को लेकर संघ के नेतृत्व में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ महामहिम राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया| फर्जी मुकदमे को तत्काल जांच कर जिलाधिकारी को जनपद से हटाने

फतेहपुर :- जनपद के जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष अजय भदौरिया के खिलाफ फर्जी मुकदमा पंजीकृत होने से पत्रकारों में बेहद आक्रोश है| इस मामले को लेकर संघ के नेतृत्व में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ महामहिम राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया| फर्जी मुकदमे को तत्काल जांच कर जिलाधिकारी को जनपद से हटाने की मांग की गई| पत्रकारों ने कहा कि कोरोना वैश्विक महामारी की लड़ाई में लगातार पत्रकारों ने प्रशासन का सहयोग किया है| मगर खामियों को उजागर करने से खिन्न जिला अधिकारी संजीव सिंह लगातार जनपद में पत्रकार उत्पीड़न कर रहे हैं |उनके उत्पीड़न से आहत पत्रकारों ने 30 मई को पत्रकारिता दिवस को काला दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है| ज्ञापन के माध्यम से संघ के अध्यक्ष अजय भदौरिया ने कहा कि जिलाधिकारी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए राजस्व निरीक्षक को वादी बनाकर एक फर्जी आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया गया है जिसमें एक ट्वीट के माध्यम से कम्युनिटीज किचन बंद होने की अफवाह फैलाने का आरोप व एक रैकेट चलाने का अनर्गल आरोप लगाया गया है |संघ के अध्यक्ष ने कहा कि 32 वर्ष से लगभग मैं इस अध्यक्ष पद पर हूं और पहली बार किसी अधिकारी द्वारा मेरे ऊपर अनर्गल आरोप लगाए गए हैं| मेरी छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है |
इसी प्रकार जनपद के नसेनिया गौशाला का मामला पूर्व में आया हुआ था जहां डीपीआरओ की मौजूदगी में गौशाला में बिजली न होने की बात को पत्रकार ने उठाया था  जबकि बिजली का पैसा जमा हो चुका था जिसमें भी जिलाधिकारी महोदय ने अपने सचिव के माध्यम से मीडिया प्रभारी को चेतावनी दी थी| परंतु इस पर पत्रकार ने जिलाधिकारी महोदय का एक भी दबाव ना मानते हुए मुद्दे को उठाया और गौशाला में आज समुचित रूप से विद्युत व्यवस्था हो गई|
आज सभी पत्रकारों का कहना है कि अगर आगामी 30 तारीख के पहले पत्रकार के ऊपर फर्जी मुकदमा समाप्त नहीं हुआ और जिलाधिकारी के कार्यकाल का वित्तीय व पद दुरुपयोग की जांच नहीं हुई तो आगामी 30 मई को सभी पत्रकार पत्रकारिता दिवस को काला दिवस के रूप में मनाएंगे| इसके साथ साथ सोशल डिस्टेंसिंग के कानून को मानते हुए अनुमति लेकर कलेक्ट्रेट या विधान भवन के सामने विरोध दर्ज कराने के लिए मजबूर होंगे|

  • रिपोर्ट : शोभित शुक्ला

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