मरीजों की हालत नाजुक होने पर कुछ अस्पतालों द्वारा चिकित्सा विश्वविद्यालय भेजा जा रहा

मरीजों की हालत नाजुक होने पर कुछ अस्पतालों द्वारा चिकित्सा विश्वविद्यालय भेजा जा रहा

इटाव :- सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय सैफई से अब तक 85 कोरोना संक्रमित मरीज ठीक होकर विश्वविद्यालय द्वारा डिसचार्ज किये जा चुके हैं। वर्तमान में कुल 22 मरीज कोविड-19 अस्पताल में भर्ती है। इन सभी मरीजों का समुचित इलाज प्रशिक्षित मेडिकल टीम द्वारा पूरी तत्परता से किया जा रहा है। कोविड मरीजों के इलाज में विश्वविद्यालय

इटाव :- सैफई  चिकित्सा विश्वविद्यालय सैफई से अब तक 85 कोरोना संक्रमित मरीज ठीक होकर विश्वविद्यालय द्वारा डिसचार्ज किये जा चुके हैं। वर्तमान में कुल 22 मरीज कोविड-19 अस्पताल में भर्ती है। इन सभी मरीजों का समुचित इलाज प्रशिक्षित मेडिकल टीम द्वारा पूरी तत्परता से किया जा रहा है।  कोविड मरीजों के इलाज में विश्वविद्यालय द्वारा एलोपैथ के साथ ही सदियों से प्रचलित आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का भी समावेश किया गया है।

जिसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। यह जानकारी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 डा0 राजकुमार ने दी।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुरेश चन्द्र शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय में आस-पास के जनपदों जिसमें आगरा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, एटा, इत्यादि से कोविड तथा नाॅन कोविड मरीजों को भेजा जाता है। इसमें से अधिकांश मरीज बहुत ही गंभीर स्थिति में भेजे जाते हैं। प्रायः ऐसा देखा जाता है कि भेजे जाने वाले मरीजों को सम्बन्धित अस्पताल या संस्थान द्वारा कई दिनों तक भर्ती कर रखा जाता है

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तथा मरीज की स्थिति बेहद गंभीर हो जाने पर उन्हें चिकित्सा विश्वविद्यालय, सैफई रेफर कर दिया जाता है। रेफर किये जा रहे कई मरीज ऐसे होते हैं जिनको उक्त जिलों के अस्पतालों में जहाॅ वह भर्ती हैं वहीं आईसीयू केयर की सुविधा मिल सकती है। जबकि ऐसे मरीजों को बेहद ही नाजुक स्थिति में विश्वविद्यालय में भेज दिया जाता है। इनमें से अधिकांश मरीजों की ट्राॅसफर के दौरान ही स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है और विश्वविद्यालय में लगभग मरणासन्न स्थित में आते हैं जहाॅ इन्हें तुरन्त आईसीयू में भर्ती किया जाता है जिसमें से कई मरीज तो यहाॅ पहुॅचने के साथ या फिर आईसीयू में वेन्टिलेटर पर डालने के दौरान ही दम तोड़ देते है।

इस सम्बन्ध में यह भी जानना जरूरी है कि ऐसे मरीजों को मरणासन्न हालत में यहाॅ भेजने के दौरान एम्बुलेंस में ही उनकी स्थित और बिगड़ जाती है और मरीज को बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि इस प्रकार ऐसे मरीजों की मृत्यु की जिम्मेदारी उन चिकित्सकों एवं संस्थानों की होगी जो मरीज को समुचित गंभीर बीमारियों के दौरान आईसीयू सुबिधा न देकर उनकी नाजुक स्थित देखते हुए भी रेफर कर देते है। इसमें से कई मरीज इतने गंभीर होते हैं कि यहाॅ तक पहुॅचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।

रिपोर्ट शिवम दुबे

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