इलाकों में अक्सर निकलते रहते हैं, अजगर

इलाकों में अक्सर निकलते रहते हैं, अजगर

हापुड़ (उत्तर प्रदेश) :- के हापुड़ जनपद में बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के बनखंडा गांव को अजगर (Python) के ‘बसेरा’ के तौर पर भी जाना जाता है। सोमवार को एक बार फिर सड़क किनारे एक पेड़ पर 15 फीट लंबा अजगर निकलने से लोगों में हड़कंप मच गया। अजगर पेड़ पर कई घंटे तक कुंडली मारकर

हापुड़ (उत्तर प्रदेश) :-  के हापुड़ जनपद में बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के बनखंडा गांव को अजगर (Python) के ‘बसेरा’ के तौर पर भी जाना जाता है। सोमवार को एक बार फिर सड़क किनारे एक पेड़ पर 15 फीट लंबा अजगर निकलने से लोगों में हड़कंप मच गया। अजगर पेड़ पर कई घंटे तक कुंडली मारकर लिपटा रहा। अज़गर को देखकर लोगों ने वन विभाग को सूचना दी। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद पेड़ से अजगर को नीचे उतारा और एक बोरे में भरकर जंगल में छोड़ने के लिए ले गए। इस दौरान लोगों की भीड़ अजगर को देखने के लिए उमड़ पड़ी।

फिलहाल, अजगर को वन विभाग की टीम अपने साथ ले गई है। बाबूगढ़ थाना क्षेत्र का ये इलाका गंगा खादर क्षेत्र के पास में होने के चलते इन इलाकों में अक्सर अजगर निकलते रहते हैं। कभी किसानों के खेतों में तो कभी पेड़ पर अजगर पहले भी कई बार मिल चुके हैं। वन विभाग के कर्मचारी रवि कुमार ने बताया कि 15 फीट लंबा अजगर पेड़ से उतारकर बोरे में भरकर जंगल में छोड़ने के लिए ले जाया जा रहा है। यह अजगर एक मादा है और इसका आकार भी काफी बड़ा है। इससे पहले 10 से 12 फीट के अजगर इलाके में मिल चुके हैं।

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बारिश की शुरुआत के साथ ही निकलने लगते हैं अजगर
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दरअसल, बारिश की शुरुआत के साथ ही अजगरों के निकलने का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। अभी हुई बारिश की वजह से ही एक बार फिर अजगर बाहर निकल रहे हैं। हापुड़ का यह गांव शुरू से ही अजगरों के लिए मुफीद रहा है। यही कारण है कि जून-जुलाई महीने से अजगरों का रुख आबादी वाले क्षेत्रों में शुरू हो जाता है। और यह क्रम अक्टूबर तक चलता रहता है। खास बात यह है। कि जनपदवासी अजगर को मारते नहीं बल्कि उसे पकड़कर जंगलों में छोड़ देते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि बारिश शुरू होने के साथ ही अजगर जंगलों को छोड़ इधर-उधर भागना शुरू कर देते हैं। जंगलों से सटे हाइवे, फैक्ट्री एरिया और आसपास के इलाके में अजगर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं।

रिपोर्ट अतुल त्यागी

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