झोलाछाप डॉक्टर पर स्वास्थ्य महकमा मेहरबान

झोलाछाप डॉक्टर पर स्वास्थ्य महकमा मेहरबान

श्रावस्ती :- योगी शासन में सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा कुछ हद तक सुधर गई है पर इन सीएचसी केंद्रों से जुड़े और क्षेत्र में बिना डिग्री के सैकड़ों झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं जिसकी छोटी सी बानगी विकासखंड गिलौला अंतर्गत गिलौला बाजार में देखी जा सकती है। यहां पर लोधन

श्रावस्ती :- योगी शासन में सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा कुछ हद तक सुधर गई है पर इन सीएचसी केंद्रों से जुड़े और क्षेत्र में बिना डिग्री के सैकड़ों झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं जिसकी छोटी सी बानगी विकासखंड गिलौला अंतर्गत गिलौला बाजार में देखी जा सकती है।

यहां पर लोधन पुरवा जाने वाली मार्ग पर सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय के ठीक सामने मां मनसा मेडिकल स्टोर नाम से संचालित विनय कुमार को किसी भी अधिकारी का भय नहीं है इस झोलाछाप डॉक्टर के यहां विगत कुछ माह आम जनता की शिकायतों पर पूर्व एसीएमओ के द्वारा छापेमारी की गई थी तथा छापेमारी के दौरान भौतिक सत्यापन कराने के लिए कार्यालय बुलाया गया था।

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उसके बाद भी औपचारिकता निभाकर विनय कुमार फिर से खुद की मेडिकल स्टोर कम अस्पताल में आकर अवैध तरीके से झोलाछाप डॉक्टरी शुरू कर दिया। अवैध तरीके से संचालित अस्पताल में झोलाछाप डॉक्टर अधिकारियों से सांठगांठ करने के बाद आज तक कार्यालय में दस्तावेजों के सत्यापन के लिए नहीं पहुंचा।


उस छापेमारी के दौरान उसके मेडिकल स्टोर से फार्मेसी की तमाम प्रतिबंधित दवाइयां भी बरामद हुई थी। इस झोलाछाप विनय कुमार के विरुद्ध स्वास्थ्य महकमे द्वारा आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। इस मसले की खबर विगत कुछ दिनों पूर्व हिंदी दैनिक समाचार पत्र वॉइस आफ लखनऊ ने बड़ी प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसको लेकर इस झोलाछाप डॉक्टर ने पत्रकारों के ऊपर नाजायज दबाव व अपनी ऊंची पहुंच एवं दबंगई के बल मारपीट पर आमादा हो गया।

इसी बीच न्यूज़ क्रांति की टीम ने सच्चाई जाने की कोशिश की तो विनय देवरी संचालक मां मनसा मेडिकल स्टोर    गले में आला डालकर, हाथो  में इंजेक्शन लेकर मरीज को लगा रहे थे। मौजूदा मेडिकल स्टोर की हालत देखकर ऐसा लग रहा था कि इस झोलाछाप डॉक्टर विनय कुमार पर स्वास्थ्य महकमा पूरी तरीके से मेहरबान है। ग्रामीणों एव  पत्रकारों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिम्मेदार अधिकारियों से अवैध फार्मेसी कम अस्पताल को बंद कराने की मांग की है।

  • रिपोर्ट – अंकुर मिश्र

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