गो-आश्रय स्थलों को स्वावलम्बी बनाये जाने पर जिलाधिकारी ने दिये दिशा निर्देश

गो-आश्रय स्थलों को स्वावलम्बी बनाये जाने पर जिलाधिकारी ने दिये दिशा निर्देश

उन्नाव :- 02 जुलाई 2020 जिलाधिकारी श्री रवीन्द्र कुमार की अध्यक्षता में कल देर रात विकास भवन सभागार में निराश्रित गोवंश को संरक्षित करने हेतु संचालित गो आश्रय स्थलों को स्वालम्बी बनाने के उद्देश्य से बैठक का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी ने मुख्य पुशचिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि वृहद गो संरक्षण केन्द्र एवं अस्थायी

उन्नाव :- 02 जुलाई 2020 जिलाधिकारी श्री रवीन्द्र कुमार की अध्यक्षता में कल देर रात विकास भवन सभागार में निराश्रित गोवंश को संरक्षित करने हेतु संचालित गो आश्रय स्थलों को स्वालम्बी बनाने के उद्देश्य से बैठक का आयोजन किया गया।


जिलाधिकारी ने मुख्य पुशचिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि वृहद गो संरक्षण केन्द्र एवं अस्थायी गोवंश आश्रय स्थलों पर बन्धा एवं मेढ़ पर बायो फेन्सिग के लिये करौंदा, मेंहदी, खेखसा, बोगेनबेलिया, कनेर, जेट्रोफा आदि पौधे लगाए जाय।

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वृहद गो संरक्षण केन्द्र एवं अस्थायी गोवंश आश्रय स्थलो पर उपलब्ध भूमि के  अनुसार छायादार वृक्ष जैसे- पाकड, खिरनी,पीपल, बरगद, मौलश्री जामुन आदि के वृक्षों को आवश्यकतानुसार लगाये जाये। जिससे संरक्षित पशुओं को गर्मियों में पर्याप्त मात्रा में छाया मिल सके।

हरदोई जनपद की भाॅति आपके जनपद के जिन गोवंश आश्रय स्थलों पर पर्याप्त भूमि उपलब्ध है वहां पर नैपियर ग्रास लगायी जाय। इसकी जड़ मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, हरदोई से सम्पर्क कर प्राप्त की जा सकती है एवं अन्य प्रजाति की घास भी मनरेगा से लगाई जाय जिससे गोवंश आश्रय स्थलों पर संरक्षित पशुओं को वर्ष भर हरे चारे की उपलब्धता बनी रहे।


उन्होंने बताया कि वृहद गो संरक्षण केन्द्र एवं अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल पर जीवामृत तैयार कराकर सम्बन्धित क्षेत्र के कम से कम 100 कृषकों को कृषि विभाग से चिन्हित कराकर विक्रय किया जाय। गोबर के लटठे, गमले एवं मास्कीटो क्वायल, अगरबत्ती को भी तैयार कराया जाय।

देशी प्रजाति की अच्छी नस्लों का गोवंश आश्रय स्थलों पर वर्गीकृत वीर्य स्ट्राज प्रयोग करके उन्नतशील नस्ल/अधिक उत्पादकता वाली साहीवाल , गिर एवं हरियानान नस्ल की बछिया उत्पन्न किया जाये। अस्थायी गोवंश आश्रय स्थलों को स्वालम्बी बनाये जाने हेतु स्थलों पर घन जीवामृत, नेडप या वर्मी कम्पोस्ट से तैयार की जाने वाली।

जैविक खाद को उद्यान,वन,कृषि विभाग, पंचायतों कार्यदायी सस्थाओं आदि को विक्रय किया जाये। गोवंश आश्रय स्थलोें को स्वावलम्बी बनाये जाने हेतु संचालित की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों को महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ भी जोडा जाए, जिससे उत्पादों को तैयार कर उनका विपणन करके विभिन्न अधिकाधिक रोजगार भी सृजित किया जाय।


बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डा0 राजेश कुमार प्रजापति,  मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा0 प्रमोद कुमार सिंह, खंड विकास अधिकारी,जिला विद्यालय निरीक्षक श्री राकेश कुमार पाण्डेय, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी श्री राज दीप वर्मा, उप निदेशक सूचना डा0 मधु ताम्बे सहित सम्बन्धित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी गण आदि उपस्थित थे।

रिपोर्ट पंकज शुक्ला,

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