कुवैत में कार्यरत भारतीय कामगारों के लिए बुरी खबर, लौटना पड़ सकता है अपने वतन वापस

कुवैत में कार्यरत भारतीय कामगारों के लिए बुरी खबर, लौटना पड़ सकता है अपने वतन वापस

उत्तर प्रदेश :- भारतीय कामगारों के लिए रोजगार के अवसरों का सदानीरा कुंआ कहलाने वाले खाड़ी मुल्कों में अब सूखा गहराने लगा है। सउदी अरब, ओमान के बाद अब कुवैत ने भी अपने यहां विदेशी नागरिकों की बजाए स्थानीय लोगों को नौकरियों में तरजीह देने वाले कानून को पारित करने की तैयारी कर ली है।

उत्तर प्रदेश :- भारतीय कामगारों के लिए रोजगार के अवसरों का सदानीरा कुंआ कहलाने वाले खाड़ी मुल्कों में अब सूखा गहराने लगा है। सउदी अरब, ओमान के बाद अब कुवैत ने भी अपने यहां विदेशी नागरिकों की बजाए स्थानीय लोगों को नौकरियों में तरजीह देने वाले कानून को पारित करने की तैयारी कर ली है। इस कानून के पारित होने पर न सिर्फ कई भारतीय नागरिकों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ सकता है बल्कि करीब 8 लाख भारतीयों के सामने वापस लौटने की भी मजबूरी होगी।

कुवैत में बहुत बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं और वहां काम करने वाली विदेशी आबादी का समसे बड़ा हिस्सा हैं। कुवैत की नेशनल असेंबली की कानूनी और विधायी समिति में नए एक्सपैट कोटा बिल के मसौदे को मंजूरी मिलने के बाद भारतीयों के आगे संकट गहरा जाएगा।

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स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कुवैत का नया प्रस्तावित कानून, करीब 15 फीसद नौकरियां स्थानीय लोगों को दिए जाने की बात करता है। ऐसे में कुवैत की 43 लाख की आबादी में से 14 लाख भारतीयों पर इसका बड़ा असर होगा।

पूर्व राजदूत अनुल त्रिगुणायत जैसे जानकारों के मुताबिक पहले ही संकट के दौर से गुज़र रही खाड़ी मुल्कों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए कोरोना संकट ने मुसीबत बढ़ा दी है। जहां एक तरफ कच्चे तेल के दाम काफी कम हैं। वहीं गहरी आर्थिक मंदी का खतरा भी उभरा है।

रिपोर्ट अमित कुमार श्रीवास्तव

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