मां की मौत के बाद पिता का सहारा बन गई थी शबनम

मां की मौत के बाद पिता का सहारा बन गई थी शबनम

शाहजहांपुर : मां की मौत के बाद इकलौती बेटी शबनम अपने सात बच्चों के साथ पिता अल्ताफ का सहारा बन उनके पास रहने लगी भी। उसके पति मोहम्मद आसिम दिल्ली में रंगाई-पुताई का काम करते थे। दो साल पहले उनकी मौत हो गई थी। आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से शबनम घरों में

शाहजहांपुर : मां की मौत के बाद इकलौती बेटी शबनम अपने सात बच्चों के साथ पिता अल्ताफ का सहारा बन उनके पास रहने लगी भी। उसके पति मोहम्मद आसिम दिल्ली में रंगाई-पुताई का काम करते थे। दो साल पहले उनकी मौत हो गई थी। आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से शबनम घरों में काम कर बच्चों का पालन-पोषण करने लगी। वहीं, बड़ा बेटा दानिश दिल्ली में शाहदरा की रफीक मार्केट में दादी सजीला के साथ किराए के मकान में रहने लगे। दानिश वहां रिक्शा चलाते हैं।

पिता करते हैं चौकीदारी

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सत्तर वर्षीय अल्ताफ एक वर्कशॉप में चौकीदारी करते है। ताकि घर में आर्थिक सहयोग दे सकें। इकलौती बेटी, नाती व नातिन की मौत से अल्ताफ भी पूरी तरह से टूट गए। वह घर के एक कोने में बैठकर अपनी किस्मत को कोसते रहे। आंखों में अरब सागर लेकर और हाथ जोड़कर डीएम-एसपी को हादसे की जानकारी देते रहे।

17 जुलाई को मां के पास पहुंची रूबी

हादसे में मरी रूबी की शादी शहर के लोहारों वाले चौराहे के पास रहने वाले मोहम्मद अब्दुल कादिर से हुई थी। कादिर भी दिल्ली में रिक्शा चलाते थे। कुछ दिनों से वह वापस घर आ गए थे। वहीं रूबी 17जुलाई को मां के पास रुकी थी।

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