आस्था के सैलाब में, सोशल डिस्टिग की उडी धज्जिया

आस्था के सैलाब में, सोशल डिस्टिग की उडी धज्जिया

श्रावस्ती :- पुलिस की सख्ती पर भारी पड़ी आस्था ! सावन के तीसरे सोमवार व अमावस्या के पर्व पर लाखों की संख्या में भक्तों का उमड़ा जनसैलाब हर हर महादेव, बमबम भोले के जयकारों के साथ लगाई। आस्था की डुबकी बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की लगाई बाबा भोलेनाथ से अर्जी

श्रावस्ती :- पुलिस की सख्ती पर भारी पड़ी आस्था ! सावन के तीसरे सोमवार व अमावस्या के पर्व पर लाखों की संख्या में भक्तों का उमड़ा जनसैलाब हर हर महादेव, बमबम भोले के जयकारों के साथ लगाई।

आस्था की डुबकी बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की लगाई बाबा भोलेनाथ से अर्जी ,बेलपत्र ,फूल धतूरा शमी दूर्वा धूप दीप नैवेद्य आदि से बाबा विभूति नाथ का पूजन किया ,वही दुकानों से प्रसाद आदि की खरीदारी की क्षेत्रीय पुलिस के लाख कोशिशों के बाद भी आस्था के आगे सब कुछ नाकाम साबित हुआ।

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इस कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिंग व माँक्स तथा सारे नियम कानून धरे रह गए। भक्तों का जनसैलाब उमड़ा क्षेत्रीय पुलिस की लाख कोशिशों के बाद भी बाबा विभूतिनाथ व के भक्तों को रोकने में नाकाम रही।


मालूम हो कि हिमालय की तलहटी व जंगलों के बीच में स्थित बाबा विभूतीनाथ शिव मंदिर मे सावन के तीसरे सोमवार पर आस्था के सामने विश्व महामारी कोरोना भारी नजर आयी जहां पर स्थापित शिवलिंग पर पहाड़ी जंगल में अदृश्य कूले से निकलते जल को बाबा के भक्त लेकर जलाभिषेक करने हेतु।

लगभग 800मीटर लम्बी कतार में खड़े होकर जलाभिषेक हेतु अपने नम्बर का इंतजार करते नजर आए, इस भारी भरकम भीड़ के चलते पुलिस प्रशासन के भी हाथ-पैर फूल गए और भीड़ को काबू करने हेतु जलाभिषेक स्थल से लगभग 5 किमी.पहले सिरसिया मुख्य मार्ग पर ही लोगों के साधन रोक दिया जिससे वहां से बोल बम भक्तों को पैदल ही जलाभिषेक हेतु जाने को मजबूर होना पड़ा।


बता दें कि सावन के सोमवार का अपना विशेष महत्व है जिसमें शिवत्व” अर्थात लोक कल्याण की वह उच्च मनोदशा जिसमें स्वयं अनेक कष्टों को सहकर भी दूसरों के कष्टों को मिटाने का हर सम्भव प्रयास किया जाता है। पुराणों में बताया जाता है जिसके अंदर लोक कल्याण का भाव न हो।

जिसकी प्रवृत्ति में परोपकार न हो और जिसका मन किसी की पीड़ा को देखकर न पसीजता हो वह व्यक्ति शिव – शिव कहने मात्र से कभी भी शिव भक्त नहीं हो सकता। जो हर स्थिति में भक्तों का कल्याण करे वह “शिव” और जो कल्याण की भावना रखे वही “शिव भक्त” है।*

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात।
ईश्वर सब का कल्याण करते हैं। आपका जीवन सरल एवं सुखमय बनाए यही शिवत्व कार बोध है।

रिपोर्ट अंकुर मिश्रा

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