आंगनबाड़ी केंद्रों पर किया जा रहा घटिया किस्म के सड़े गले चावल का वितरित

आंगनबाड़ी केंद्रों पर किया जा रहा घटिया किस्म के सड़े गले  चावल का वितरित

लखीमपुर- खीरी :- सम्पूर्णानगर थाना क्षेत्र सम्पूर्णानगर की ग्राम सभाओं में संचालित कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को वितरित किए जाने वाले राशन में घटिया किस्म का सड़ा गला चावल वितरित कर गर्भवती महिलाओं व नौनिहालों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा। आगनबाडी संचालिकाओ की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है।

लखीमपुर- खीरी :- सम्पूर्णानगर थाना क्षेत्र सम्पूर्णानगर की ग्राम सभाओं में संचालित कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को वितरित किए जाने वाले राशन में घटिया किस्म का सड़ा गला चावल वितरित कर गर्भवती महिलाओं व नौनिहालों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा। आगनबाडी संचालिकाओ की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है।



बताते चलें कि थाना क्षेत्र में इन दिनों आंगनवाड़ी में अध्ययनरत जीरो से 6 वर्ष तक के छात्र-छात्राओं को राशन दिया जा रहा है साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी राशन दिया जा रहा है जिसमें एक किलो दाल, एक किलो चावल , एक किलो गेहूं तथा 500 ग्राम रिफाइन आदि शामिल है ।सोमवार को थाना क्षेत्र की ग्राम सभा कृष्णा नगर मैं संचालित एक केंद्र की कार्यकत्री शैल कुमारी द्वारा उपरोक्त राशन का वितरण कराया गया।

ग्राम कृष्णानगर के मजरा खैरानी निवासी पूनम देवी पत्नी तूफानी सविता देवी पत्नी अजय ने अमृत विचार संवाददाता को जानकारी देते हुए बताया आंगनबाड़ी द्वारा मिला चावल खाने योग्य नहीं है जिस पर काले काले धब्बे लगे हुए हैं। उन्होंने चावल को दिखाया वास्तव में चावल सड़े गले से दिख रहे थे जिसे खाने वाले की सेहत पर कुप्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।

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वहीं सविता देवी ने बताया वह गर्भवती है उसे भी यही चावल मिला है। जब आंगनबाड़ी केंद्र संचालिका शैल कुमारी से घटिया किस्म के चावल वितरण के संबंध में बात की गई तो उन्होंने जानकारी देते हुए बताया केंद्र को चावल उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी ग्राम सभा के समूह की महिलाओं की है चावल एवं गेहूँ खरीद कर प्रति किलो एक पॉलिथीन में पैक कर केंद्र पर उपलब्ध करवाती हैं।

जिसे बच्चों या उनके अभिभावकों को बटवा दिया जाता है। इसमें मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं है। सवाल यह है क्या समूह की महिलाएं किसी भी प्रकार का राशन केन्द्र पर उपलब्ध करवा दें तो उन्हें बिना देखे भाले बंटवाना चाहिए। क्या उनकी कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती है? सवाल यह भी उठता है कि सरकार आंगनवाड़ी केंद्र के माध्यम से राशन वितरित किस लिए करवा रही है?

इसीलिए ना ताकि आंगनवाड़ी में पढ़ने वाले नौनिहालों की सेहत खराब ना हो साथ ही गर्भवती महिलाएं भी कुपोषण का शिकार ना हो परंतु घटिया किस्म के चावल को खाकर इन नोनिहालों व गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर कैसा प्रभाव पड़ेगा? यह सोचने का विषय है। इस सम्बंध में जब महिला एवं बाल विकास परियोजना केंद्र पलिया की सुपरवाइजर से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने इस सम्बंध में कल अर्थात मंगलवार को इस सम्बंध में बातचीत करने की बात कहकर टाल दिया ।

कहां तो सरकार नोनिहालों एवं गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए तरह-तरह की योजनाएं चलाती हैं । परंतु सरकारी अमले की उदासीनता के चलते सरकार की योजनाओं पर पानी फेर दिया जाता है।



रिपोर्ट-गोविन्द कुमार

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