खादी तथा ग्रामोद्योग से उपलब्ध होगा सुलभ स्वरोजगार

खादी तथा ग्रामोद्योग से उपलब्ध होगा सुलभ स्वरोजगार

आज पूरी दुनिया 2 वर्ष से कोरोना की दंश झेल रही है और पूरी दुनिया की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है उसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बेरोजगारों को रोजगार कैसे आसानी से उपलब्ध हो उसके लिए आज कोविड-19 की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए उत्तर

आज पूरी दुनिया 2 वर्ष से कोरोना की दंश झेल रही है और पूरी दुनिया की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है उसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बेरोजगारों को रोजगार कैसे आसानी से उपलब्ध हो उसके लिए आज कोविड-19 की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड कानपुर मंडल एवं उत्तर प्रदेश खादी ग्राम उद्योग महासंघ के संयुक्त तत्वाधान में एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई।

मुख्य अतिथि सत्यदेव पचौरी माननीय सांसद कानपुर नगर पूर्व कैबिनेट मंत्री खादी ग्रामोद्योग विभाग थे उनके द्वारा बताया गया कि बोर्ड का कार्य मात्र ऋण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि या उद्यमियों को उनके उत्पादों के व्यापक प्रचार-प्रसार उनकी बिक्री तथा निर्यात को बढ़ाने हेतु सदैव इसी क्रम में आज ग्रामीण औद्योगिकरण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश खादी ग्राम उद्योग तथा बोर्ड की अहम भूमिका है जिसका संबंध ग्रामीण अर्थव्यवस्था से है!

इसी क्रम में मनोज शुक्ला परक्षेत्रीय अधिकारी कानपुर मंडल द्वारा बताया गया कि उत्तर प्रदेश खादी ग्राम उद्योग बोर्ड में रोजगार के अवसर प्राप्त करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी महोदय कानपुर नगर द्वारा नगर के सभी खंड विकास अधिकारियों को पत्राचार करके उन के माध्यम से प्रवासी बेरोजगारी को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए कार्यवाही की गई है इसके अतिरिक्त जिला ग्रामोद्योग कार्यालय की विभागीय वेबसाइट से के माध्यम से घर बैठे अपने मोबाइल लैपटॉप तथा कैफे में जाकर क्रमानुसार फाइल भरे जा सकते हैं और कंफर्म होने पर उनके स्वयं पता चल जाएगा कि ऋण प्रक्रिया अगला कदम क्या होगा और आप कार्यालय तथा बैंक में स्वीकृति के लिए जानकारी कर सकते हैं!

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सुरेश गुप्ता अध्यक्ष उत्तर प्रदेश खादी ग्राम उद्योग महासंघ ने कहा कि ग्रामोद्योग तभी आगे बढ़ सकता है जब इकाइयों को जीएसटी की छूट दी जाए क्योंकि उद्यमियों पर एक तो ऋण का बोझ और दूसरा जीएसटी का बोझ होने से इकाइयां लाभ में नहीं आ पाती और बड़ी गाड़ियों की प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाती इकाइयां बंद हो जाती हैं अगर रोजगार के अवसर बढ़ाने हैं तो इकाइयों को जीएसटी से छूट दी जानी चाहिए

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