भ्रष्टाचार, पौने दो करोड़ के प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार का दीमक

भ्रष्टाचार, पौने दो करोड़ के प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार का दीमक

गोण्डा:- जिले के करनैलगंज से हुजूरपुर मार्ग के निर्माण में बिजली लाइन बिछाने में खेल शुरू हो गया है। पौने दो करोड़ के इस प्रोजेक्ट को कार्यदाई संस्था व विभाग द्वारा नए सामान का प्रयोग न कर पुराने पोल व सामानों को लगाया जा रहा है। हुजूरपुर मार्ग के चौड़ीकरण कार्य को लेकर कराये गये

गोण्डा:- जिले के करनैलगंज से हुजूरपुर मार्ग के निर्माण में बिजली लाइन बिछाने में खेल शुरू हो गया है। पौने दो करोड़ के इस प्रोजेक्ट को कार्यदाई संस्था व विभाग द्वारा नए सामान का प्रयोग न कर पुराने पोल व सामानों को लगाया जा रहा है। हुजूरपुर मार्ग के चौड़ीकरण कार्य को लेकर कराये गये बिजली लाइन सिप्टिंग में बड़ा खेल सामने आया है। नई की जगह पुरानी सामग्री का प्रयोग करके लाइन बिछा दी गई। जिसे इसकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी मिली थी। उन जिम्मेदारों ने भी बहती गंगा में हाथ धोना शुरू कर दिया। मामला करनैलगंज, सेमरा, हुजूरपुर मार्ग से जुड़ा है। इस मार्ग पर गोण्डा जिले की सीमा किलोमीटर 12 तक सड़क  चौड़ीकरण का कार्य कराया जाना है, जिसकी वजह से मार्ग के किनारे स्थापित विद्युत लाइन की सिप्टिंग करायी जानी थी। लोक निर्माण विभाग इस कार्य को करा रहा है। जिसमें बिजली लाइन शिफ्टिंग की जिम्मेदारी बिजली विभाग को दी गई है। इस पर 1.79 करोड़ रुपये का इस्टीमेट बनाकर लाइन सिप्टिंग की जिम्मेदारी एक कार्यदाई संस्था को दे दिया गया। इस सम्बंध में पीडब्ल्यूडी के जेई अनिल कुमार बताते हैं कि मार्ग के चौड़ीकरण में बिजली लाइन शिफ्टिंग व अन्य कार्य का भी भुगतान पीडब्ल्यूडी के द्वारा ही कराया जाना है। जिसमें बिजली लाइन शिफ्टिंग में बिजली विभाग किसी ठेकेदार से कार्य करा रहा है। जो भी भुगतान वेरिफाई होता है। उसका भुगतान विभाग को दिया जाता है। उन्होंने बताया कि यह जांच करना पड़ेगा कि पुराने सामान लगाए गए हैं या नये। उधर, बिजली विभाग के एक्सईएन बीएल सिंह बताते हैं कि लाइन शिफ्टिंग का कार्य एक पंजीकृत संस्था के माध्यम से कराया जा रहा है। अब पुराने उपकरण या बिजली के सामान लगाने की जानकारी नहीं हुई है। विभाग लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। 

क्या कहते हैं एसडीएम

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एसडीएम हीरालाल का कहना है कि नए प्रोजेक्ट कार्य में पुरानी सामग्री का प्रयोग करने की शिकायत मिली है। उसकी जांच तहसीलदार से कराई जाएगी। यदि पुरानी सामगी का प्रयोग हुआ है तो जिलाधिकारी को जांच रिपोर्ट भेजी जाएगी।

रिपोर्ट राहुल तिवारी

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