बारी बारिश बनी आफत , नहीं नसीब हुई शमशान की छत

बारी बारिश बनी आफत , नहीं नसीब हुई शमशान की छत

जालौन : अभी कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश की सियासत बहुत ही गंभीर मुद्दे पर गर्म थी। मुद्दा था श्मशान घाट और कब्रिस्तान को लेकर लेकिन राजनीति मुद्दा धरातल पर कितना सही है। एक तरफ शासन प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रो में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं संचालित किए है लेकिन विकास कार्यो से

जालौन : अभी कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश की सियासत बहुत ही गंभीर मुद्दे पर गर्म थी। मुद्दा था श्मशान घाट और कब्रिस्तान को लेकर लेकिन राजनीति मुद्दा धरातल पर कितना सही है। एक तरफ शासन प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रो में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं संचालित किए है लेकिन विकास कार्यो से अछूती कोंच ब्लॉक की ग्राम पंचायत बरोदा कला में लोगो को शमशान घाट में टेंट लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है।उत्तर प्रदेश में ना जाने कैसी कैसी तस्वीरें सामने निकल कर आती हैं आपने सुना होगा कि ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर टेंट लगाकर शादियां संपन्न कराई जाती है।

लेकिन उत्तर प्रदेश के जालौन जिले कोंच विकास खण्ड के ग्राम बरोदा कला मैं ग्रामीणों को टेंट लगाकर एक बुजुर्ग का अंतिम संस्कार करना पड़ा जो तस्वीरें कहीं ना कहीं गांव की विकास की पोल भी खोल रही है बता दें ग्राम बरोदा कला में गुरुवार को एक बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया जाना था इस गांव में श्मशान घाट के लिए जगह तो आवंटित की गई है लेकिन वह जगह खेत जैसी नजर आती है।

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इस गांव में श्मशान घाट में कोई व्यवस्था नहीं है क्योंकि इस समय बारिश का मौसम चल रहा है तो निश्चित ही अंतिम संस्कार के दौरान व्यवस्थाएं होना लाजिमी हो जाता है लेकिन इस बरोदा कला गांव में श्मशान घाट में कोई व्यवस्था नहीं होने के चलते बारिश के दौरान ग्रामीणों को टेंट लगाकर बुजुर्ग का अंतिम संस्कार करना पड़ा जिसकी तस्वीरें भी सामने आई है जो कहीं ना कहीं गांव में विकास की व्यवस्था की भी पोल हो गई।

रिपोर्ट : नवीन कुशवाहा

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